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जिस नजर से देखो ,वैसी यह दुनिया
बसती है यहां ,प्यारी - प्यारी जिंदगियां ।।
जीव -जंतु ,पक्षियों , इंसान का है बसेरा
नित-दिन होता ,सूर्य की किरणों से सवेरा ।।
तरूओं , पुष्पों से भरी , सुंदर यह दुनिया
हर ऋतुओं में लहराती ,करती अठखेलियां ।।
समझ जाए इंसान , प्रकृति का यह वरदान
गम किस बात की , पूरे हो सारे अरमान ।।
मेहनत ,अच्छे कर्मों से , मिलती सफलता
"दृढ़ संकल्प"लेकर चलो ,न मिलेगी विफलता ।।
सुख-दुख हैं दो पहलू , होते जीवन सार
जिंदगी हर हाल में जीयो, लगा लो नैय्या पार ।।
प्यारी ,अनोखी है , "जीवन से भरी यह दुनिया "
जी लेते हैं ,हंसी खुशी अपनी-अपनी जिंदगियां ।।
✍️मनीषा भुआर्य ठाकुर(कर्नाटक)

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