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ना बांध दायरों में मुझको, जीने दे आवारगी /
थोड़ा हंस लूं थोड़ा रो लूं ,
ऐसी दे जिंदगी //
ख्यालात सबके जो बदल दे,
ऐसी तालीम ज़माने को दे /
मैं तो बेटी हूं तुम्हारी,
करूंगी कैसे दिल्लगी //
ना बांध ---------- आवारगी //
ओढ़ा के कफन सा बदन को,
ढकती है मां क्यूं मुझको /
मेरी बेचैनी बढ़ जाती है,
देख उन आंखो में तिष्नगी //
ना बांध ---------- आवारगी //
राह चलते चलते जो पड़े,
मुझको झुकानी ये नज़रें /
बोली ऐसी मत बोलो,
तुम करके परवानगी //
ना बांध ---------- आवारगी //
बनते हो मेरे रहनुमा तो,
कद्र भी मेरी तुम जानो /
बेगैरत सी समझो न मुझे,
यूं जता के दिवानगी //
ना बांध --------- आवारगी //
माना कि जन्नत है यहां पे,
बस ! कदमों में अपनों के /
पर इतना ना झुका मुझको,
कि हो न पाए बंदगी //
ना बांध ---------- आवारगी //
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स्वरचित व मौलिक
-- कीर्ति रश्मि "नन्द
वाराणसी

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