कभी चले जाए चांद के उस पार तो
 तुम उदास ना होना,
 वह बूढ़ी अम्मा जो वहां चरखा चलाती है
 उससे आवाज दे पता मेरा पूछना।।।।।
 जब आंसूओं की अदालत हो, तब गवाही तुम दे देना,
 हम बेखौफ हो भुगत लेंगे सजा बस साथ तुम दे देना ।।।।
मैं रहूं ना रहूं मेरी हसरतें ,गर यादें रही तुम्हें,
बस उन हसरतों को वक्त बेवक्त, आवाज तुम दे देना।।।।
अमावस की रात को, तुम परेशान ना होना,
 गुम है चांद तो क्या, तुम यादों के चिराग जला देना।।।।। और जीने मरने में फर्क है, कुछ मात्राओं का 'सीमा,
'मौत आ भी जाए तो गिला नहीं पर जीते जीतो मरनेनादेना।