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वो भी क्या दिन थे जब हम पहली बार मिले थे
अजनबी सी अहसास हमारी दिल को छुए थे
तुम बेखबर थे दिल के बातो से मैं भी अनजान थीं
कब दिल लगी होगई एक दूसरे से हमे तो कुछ खबर ना थीं...!!
आज भी याद हैं वो आँखों का मिलना हमारा
खोगये थे एक दूसरे की आँखों में वक़्त जैसे रुक सा गया था
पता नहीं कब आँखों ही आँखों में दिल ने ये गुस्ताखी कर लिया
कब दिल लगी होगई एक दूजे से हमें तो कुछ खबर ना थीं...!!
कुछ बोले नहीं तुम भी होंठ मेरे भी खामोश सी थीं
सून पारहे थे एक दूसरे के दिल की धड़कन इतनी तेज़ थीं
जाने कैसी हवा चली थीं दिल एकरारे प्यार कर लिया
कब दिल लगी होगई एक दूजे से हमें तो कुछ खबर ना थीं...!!
वो तेरा रोज़ मेरी गली से गुज़रना और छुप छुप कर मुझे देखना
दिल को अच्छा लगने लगा था तेरा वो मुस्कुराती चेहरा
लाख कोशिस की रोक लू अपनी अहसास को पर रुकी नहीं
कर ही लिया दिल लगी तुमसे हमें तो कुछ खबर ही ना चली.......!!
जो लड़की पहले कभी एक अल्फाज़ भी नहीं लिखी थीं
आज तेरे प्यार में अपनी चाहत की तराने लिखा करती हैं
कितना मोहब्बत हैं दिल में तेरे लिए सोचना ज़रा बेखबर
आज नैना एक शायरा हैं जो कभी शायरी के मतलब तक की खबर ना थीं.....!!
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