आ जाओ कि अब कहीं मेरा दिल लगता ही नहीं
बिन तेरे सिवा अब और कहीं ये नजर ठहरता ही नहीं
आ जाओ मेरे रूबरू कि जी भरके देख लूं तुम्हे
बिन तेरे अब मेरा वक़्त गुजरता ही नहीं
आ जाओ कि ये समां और भी खूबसूरत हो जाए
बिन तेरे अब मेरा मन सवंरता ही नहीं
आ जाओ कि ले चलूं तुझे अनजाने सफर मे
बिन तेरे अब एक भी कदम अकेले चलता ही नहीं
आ जाओ कि अब तुम्हे आना ही होगा "लखनवी"
बिन तेरे अब ये तन्हा सफर कटता ही नहीं
आ जाओ कि छेड़ दूँ एक दिलकश तराना कोई
बिन तेरे अब एक भी सुर निकलता ही नहीं
आपका मुकेश "लखनवी"

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