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पागल हुआ हैं मौसम भी मुझसे करती छेड़खानी हैं
मानती नहीं हैं कहाँ मेरी हवाएं भी मनमानी करती हैं
मेरे संग संग ये फ़िज़ाये भी दीवाने तुझे बुला रही हैं
आजाओ परदेसी घर वापस तेरी दीवानी तुझे पुकार रही हैं
छोटी सी पौधे से बढ़ी पेड़ बन गयीं वो बेल जो तुमने लगायी थीं
वो भी तुझे ढूंढ रही हैं कहा हैं वो जिसने बड़े प्यार से मुझे बसायी थीं
क्यूँ नहीं समझते बेक़रारी दिल के यूँ बेखबर ना बना करो
आजाओ परदेसी घर वापस तेरी दीवानी तुझे पुकार रही हैं
कब तक हाल जाने एक दूसरे की कागज़ की पन्नों से
कब तक निहारु चाँद में तुझे अपनी प्यासी नैनो से
ख़तम करो ना ये तपड़ना दिल को सुकून देने आजाओ
आजाओ ना परदेसी घर वापस तेरी प्यारी तुझे पुकार रही हैं
छुपाये रखते हो जो बात दिल की अब कह दो अपने जुबाँ से
क्या इरादा हैं आपका जाने बहार कह दो अपनी जुबाँ से
चाहत कभी छुपती नहीं ऐसा तुमने ही मुझसे कहाँ था कभी
आजाओ परदेसी घर वापस तेरी दीवानी तुझे पुकार रही हैं
तन्हाई जब भी घेरती हैं मुझे अजीब सी ख्याल टकराती हैं
कही भूल तो नहीं गए वो वादे जो दिल पे हाथ रख कर कसमें खाये थे
कोई भूल गयीं मुझसे या कोई गुनाह कर दी मैंने जो तुम आते नहीं
आजाओ परदेसी घर वापस तेरी दीवानी तुझे पुकार रही हैं
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नैना...✍️✍️💕💞
(काल्पनिक..)

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