करो योग रहो निरोग आसन और प्राणायाम काहो संयोग
आसन से शरीर और प्राणायाम से प्राण दोनों बलवान बनते हैं
शरीर और प्राण मिलकर स्वस्थ जीवन का निर्माण करते हैं
मन आनंदित होता है ध्यान से ध्यान मन की एकाग्रता
मन की एकाग्रता से यात्रा शुरू होती है आध्यात्मिकता की
आता है समभाव निर्विकारता वैराग्य
ईश्वर प्राप्ति के खुलते हैं मार्ग कण-कण में ईश्वर का दर्शन
मिलता है सौभाग्य प्रकृति से एकाकार होने का
विश्व मैत्री भाव का होता है उदय और होता है करुणा प्रेम और विश्वास का जीवन में संचार
संसार की असारता का होता है भान प्रतिभागी नहीं रहते बन जाते हैं दर्शक
करते हैं दर्शन ईश्वर के सभी रूपों का दर्शन हंसना रोना रूठना मनाना क्रोध
सृजन और विध्वंस से परे असीम ब्रह्मांड की अनंत शांति
स्वरचित मौलिक अप्रकाशित सर्वाधिकार युक्त डॉ आशा श्रीवास्तव जबलपुर

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