जीत को आदत बना लो
फिर कोई कुछ ना कर पाएगा,
तुम को हराने वाला खुद
देखना तुम से ही हार जाएगा।
तुम करते रहो प्रयास निशदिन
रखते रहो मन में आस निशदिन
कौन, कब तक तुम्हें डरा पाएगा
जीत को आदत बना लो
फिर कोई कुछ नहीं कर पाएगा।
लाख अंधेरे हो फिर भी
सूरज ने तो निकलना है
कितनी हो गम की परछाई
कभी ना कभी तो ढलना है।
अंधेरा खुद ब खुद तुमसे
देखना डर जाएगा ।
जीत की आदत बना लो
फिर कोई कुछ ना कर पाएगा
यह दुनिया रंग बिरंगी यारा
चढ़ते सूरज को करती सलाम
तुम बढ़ते जाओ आगे बस
जग में छाएगा तुम्हारा नाम
तुम्हारी हिम्मत के आगे
यह आसमान भी झुक जाएगा
जीत को आदत बना लो
फिर कोई कुछ ना कर पाएगा
तुम को हराने वाला खुद
देखना तुम से ही हार जाएगा।
सीमा कौशल
यमुनानगर हरियाणा

0 टिप्पणियाँ