चुनी है जो सज़ा ख़ुद ही
वो भुगतनी तो होगी
दवा हो चाहे कड़वी कितनी
वो निगलनी तो होगी!
हँसे है जो इतना हम
कभी यूं दिल खोलकर
रोने की भी जिम्मेदारी
अब पूरी करनी तो होगी!
यूं ही नही मिलती यहां
सज़ा कोई किसी को भी
रही है हमारी करनी जैसी
वैसी अब भरनी तो होगी!
हम तो है तैयार अकेले
ही भुगतने को सजा सारी
पर अफ़सोस कि उनको भी
अब ये भुगतनी तो होगी!!
सतीश निर्दोष
रेवाड़ी (हरियाणा )

0 टिप्पणियाँ