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दिल के फितरत भी क्या कमाल की हैं मेरी
हज़ारो गमे छुपाये बैठा हैं अपने अंदर 
पर इससे एक भी खुशियाँ छुपाये नहीं छुपता.....!!

दिल के फितरत भी क्या कमाल की हैं मेरी
कयी जख्म खालिया अपनों के हाथो ही
पर चाह कर भी किसी एक को भी चोट नहीं दें पाता....!!

दिल के फितरत भी क्या कमाल की हैं मेरी
हर दर्द हँस कर मंज़ूर किया अपनी ज़िन्दगी में
पर किसी अपने को एक पल के लिए भी दर्द में देख नहीं पाता.....!!

दिल के दुनिया भी क्या कमाल की हैं मेरी
किसी एक दिल में तो घर नहीं कर पाया आज तक
पर हर किसी को देता आया हैं अपनी दुनिया में पनाह....!!

दिल के हसरत भी क्या कमाल की हैं मेरी
खुद तो मुस्कुरा नहीं सका कभी भीड़ में भी
पर हर किसी के होठों पर मायूसी भी नहीं देख पाता....!!

इन आँखों के ख्वाहिश भी क्या कमाल की हैं मेरी
छुपा रखी हैं खुद में दर्द के आंसुओ का समंदर नैना
पर किसी के सामने आज तक कभी रो नहीं पाया....!!
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नैना....✍️✍️❣️