तब तक सौरभ दवाई का बाॅक्स ले आया था । रविश ने स्वाति के हाथ से कांच के टुकड़ों को निकाल हाथ में पट्टी बांध दी । सब दोनों को ही देख रहे थे । शादी में आई लड़कियां उस वक्त बस यही सोच रही थी कि , काश स्वाति की जगह वो होती । " हाय कितना हैंडसम लड़का है " और कई लड़कियों को स्वाति से जलन होने लगी थी । और एक स्वाति है , जिसने रविश को धन्यवाद कहा और वहां से चली गई । एक बार भी पीछे पलट कर नहीं देखा । लेकिन रविश की नजर सिर्फ स्वाति पर ही थी । आज दोपहर में ही सगाई की रस्म होनी थी । इसीलिए सब तैयार होकर होटल में बने एक हाॅल में सभी जमा हो गए । हल्के पीच कलर के लहंगे में स्वाति की मौसेरी बहन पीहू बहुत ही सुंदर लग रही थी । जल्दी ही सगाई का कार्यक्रम शुरू हो गया ।दुल्हे बने प्रतीक के बाजू में बैठे रविश की नजर स्वाति पर ही थी । स्वाति को यूं देखता देखकर रविश की छोटी बहन  ने देख लिया और उसने सौरभ को कोहनी मारी । सौरभ , रविश कान में जाकर कहा - अबे ! मुंह तो बंद कर ले , पता नहीं कितनी सारी मक्खियों ने तेरे मुंह में घुस कर आत्महत्या कर ली होगीं  ।  रविश ने देखा कि सब उसे ही देख कर हंस रहे हैं तो उसने अपना सर झुका लिया । सगाई की रस्म होने पर प्रतीक के घरवाले और पीहू के घर वाले आपस में बैठकर हंसी मजाक कर रहे थे । तभी प्रतीक की बहन किसी बात को लेकर बहुत हंस रही थी । साथ में सौरव और उसके दोस्त भी हंस रहे थे । पीहू ने सब को हंसते हुए देख कर प्रतीक से उनके हंसने का कारण पूछा तो प्रतीक ने हंसते हुए कहा - सब रवीश भैया का मजाक उड़ा रहे हैं । पता है एक बार हम सब भाई बहन एक शादी के रिसेप्शन में गए थे । हम सब ऐसे ही बातें कर रहे थे कि भैया के कालेज में पढ़ने वाली एक लड़की ने भैया को पहचान लिया और सबके सामने उन्हें गाना गाने को कहने लगी । भैया के मना करने पर भी जब वो लड़की नहीं मानी तो भैया ने माइक पकड़ कर जो गाना गाया ! हा...हा...हा...गाना नहीं गाया माइक पकड़ कर चिल्लाने लगे । अरे छोटी कौन सा गाना था वो ....याद करते हुए ..।
प्रतीक की बहन और उसके बाकि के भाई - बहन सब गाने लगे ... अंखियां नू  अंखियां च लैन दे ...मंरदिया नू सा लैन दे .... रविश गाना सुन समझ गया कि सभी उसी का मजाक बना रहे थे । इसलिए वो उन शैतान पार्टी की खबर लेने के लिए पहुंच गए । रवीश उनके पास गया ही था कि तभी उसने सुना ! पीहू शायद उन्हें अच्छे से गाना ही ना आया हो ! इसमें उनकी क्या गलती । वैसे गाना कौन सा बताया तुमने ! ऐसा कह कर स्वाति हंसने लगी । उसे इस तरह हंसते देखकर स्वाति की मां बहुत खुश थी । स्वाति को हंसता देखकर रवीश माइक लेकर स्टेज पर चढ़ गया और उसने एक पंजाबी गाना गाया ....
" नैना ...नैना ... अंखियां नू अंखियां च रैण दें , मंरदिया नू सा लैण दें ...इक तू ही बस रैवै मेरे सामने ...सारे अखर भूलावै तेरे नाम ने ...
हो आज कंइदा है जो दिल ओनू कैण दें ...
अंखियां नू अंखियां च रैण दें मंरदिया नू सा लैण दें ... गाना पूरा कर रवीश जब नीचे आया तो सब उसी को देख कर ताली बजा रहे थे । 
सौरभ ने प्रतीक को कोहनी मारी कर कहा ! साला अपना भाई तो छुपा रूस्तम निकला बे । 
प्रतीक - लगता है भैया किसी को पसंद करने लगे हैं । कहकर प्रतीक मुस्कुराने लगता है ।