शिव को जपता है संसार सारा 
यही करता जगत का उधार, 
सुखद सुयोग्य जीवन बने इसकी भक्ति से, 
आत्मस्वरूप है शिव आत्मज्ञान और मुक्ती का,
गुरुओ के भी है गुरु, शिव है  मूलाधार, 
पंसद है बिल्वपत्र और भांग, 
जो यह चढ़ाता, पाता है मनवांक्षित वरदान, 
यही परात्पर ब्रह्म है, यही जगत  आधार, 
इसी के साथ है रहना, 
शिव भक्ति का कार्य है करना, 
जब अंत निकट आएगा , 
मुड़ जाउंगी शिव धाम की ओर, 
शिव शक्ति के प्रतिरुप है, 
शिव समान  दाता नहीं, भक्ति भोग अनुरूप है, 
दुर भी जाना पड़े अगर तो शिव को साथ ले के जाउंगी, 
अब यही है मेरा  संसार सारा l
देवों के देव महादेव है,  जग निरालाl