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देश है अपना सभी देश की है बेटियां,
मां,बहन,बेटी,बहू  एक सांझा चूल्हा---
सभी की एक जैसी है रोटियां,
अपनी हो या पराई लेकिन है बेटियां,
देश है अपना सभी देश की है बेटियां, 

समझ समझ का फेर है समझने की कोशिश करिए,
सभी है अपने चमन के नजरिया तो बदलिए,
क्यों किसी की बेटी पर उंगली उठाया करते हैं,
क्यों किसी पर नापाक नजरें गड़ाया करते हैं,

क्यों मनमानी कर के पाप कमाया करते हैं,
क्यों गुनाह करके कीमती जीवन गवाया करते हैं,
शांत होकर सोच समझकर जरा आगे बढ़ीए,
जन्म मिला इंसान का इंसानियत तो रखिए, 

हावी ना हो जाए सर पर जब जुल्म का पहरा,
देखिए आईने में स्वयं अपना ही चेहरा,
कितने पुण्य कर्म से इंसानी जन्म मिला,
यह वरदान है उस परमात्मा का ये उपहार तुम्हें मिला,

इस वरदान का तुम दुरुपयोग ना कीजिए 
नाम रौशन हो अपना  कुछ शुभ काम कीजिए ,
यह देश है अपना ना बदनाम कीजिए,
कहते हैं प्रत्येक नर में नारायण का वास है,
और प्रत्येक नारी में लक्ष्मी निवास है,

नारायण बनना मुश्किल है,एक अच्छे इंसान बन
जाइए, अच्छाई ना कर सको तो बुराई भी ना 
कमाइए,खुद अपने सम्मान के आदी बन जाइए,
नारी का सम्मान करो एहसान रहेगा,
ना घटेगा रुतबा  सदा तुम्हारा मान रहेगा,

नारी जन्म दात्री है अस्तित्व इसी से,
जन्म के बाद ही पाया है व्यक्तित्व इसी से,
नारी जगत की जननी है ना बंधन की बेड़ियां,
देश है अपना सभी देश की है बेटियां,
मां बहन बेटी बहू एक सांझा चूल्हा,
सभी की एक ही जैसी है  रोटियां,


        संगीता वर्मा✍✍

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