मैं एक खत लिखूँ,
अपना मत लिखूँ।
ईश्वर से करुँ प्रार्थना,
रहे सब सलामत लिखूँ।
भजन में बीते दिन रैन,
तेरी ही संगत लिखूँ।
मनमोहक कैलाश ऐसा,
चरणों में जन्नत लिखूँ।
भस्म बने इस शरीर को,
तुझमें घुली रंगत लिखूँ।
शिवाला दिल में बनाकर,
तेरे संग की चाहत लिखूँ।
उठती गिरती"झा"पलकें मेरी,
शिव पार्वती की इबादत लिखूँ।
आरती झा(स्वरचित व मौलिक)
दिल्ली
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