नारी अवला नहीं सवला है
निर्बल समझे जो नारी को 
मैं उन्हें बताना चाहता हूँ 
नारी ने स्वयं की शक्ति से 
जीती है हर एक स्पर्धा 
हर रण मैं ध्वज है फहराया 
युद्ध हो या प्रतिस्पर्धा 

मैं नमन करूँ उस नारी का
यौवन को अर्पित कर डाला 
राष्ट्र के हित में नारी ने 
जीवन को समर्पित कर डाला 

मुझे गर्व है तेरे साहस पर 
तूने राष्ट्र जनों को हरसाया
अपनी शौर्य कला प्रदर्शित कर 
परदेश राष्ट्र ध्वज लहराया 

          हनुमान कुमार