एक समय की बात है किसी जंगल में चार बन्दर रहते थे, चारों बंदर एक पेड़ की डाल पर बैठे-बैठे केले खा रहे थे और छिलकों को नीचे की और फेंकते जा रहे थे अचानक से एक खूबसूरत जादुई परी चिड़िया का रूप बनाकर बंदरों के पास आई और बंदरों से बोली  कृपया मुझे भी एक केला दे दिजीये, बहुत भूख लगी है, नही खाऊंगी तो मैं मर जाउंगी। बंदर बहुत चालाक थे। सभी ने केले देने से इन्कार कर दिया, तभी परी अपने वास्तविक स्वरूप में प्रकट हुई और अपनी जादुई शक्ती से बहुत सारे केले प्रकट किये, यह देख चारों बंदर परी के पास आये और कहने लगे हमें माफ कर दिजीये परी रानी आपने तो हमसे केवल एक ही केला मांगा था वो भी हमने आपको नही दिया,धिक्कार है हमे,बहुत ही लालची हो गये थे हम सब।
फिर परी रानी ने कहा - मैं तुम्हे माफ करती हूँ पर आगे से ध्यान जरुर रखना, तुम सब हमेशा जरुरतमन्द की मदद करना। नेक कार्य को करने में जरा भी वक्त मत लगाना। मैंने भी कई जरूरतमंदो की मदद की थी इसिलिए भगवान ने खुश होकर मुझे परी रूप और जादुई शक्ती प्रदान की है।
यह सब सुनकर चारों बंदरों ने फैसला किया की वह आगे से हर जरुरतमन्द की मदद करेंगे।
                   लक्ष्मी जैन
            सवाई माधोपुर,राजस्थान