पहले खुश रहती थी जो
गृहकार्य के काउंटडाउन में
अब कवियित्री बन गई
मेरी बीवी लॉक डाउन में
काम तो अब भी करती है वो
बड़ी निपुणता के साथ में
पर जैसे ही समय मिले
मोबाईल है लेती हाथ में
जल्दी जल्दी निपटाती है
रोज के सारे काम धाम
बच्चों की पढ़ाई, या हो पूजा
सास ससुर का भी रखती ध्यान
पहले की तरह मुझसे अब
लड़ती भी नहीं है
कभी कभी लगता अब मेरी केयर
करती ही नही है
मम्मी लिखती कविताएं
सोच बच्चे भी इतराते हैं
अपनी माँ को देख सफल
खुशी से डांट भी अब खा जाते हैं
आत्मविश्वास नया जागा
मंच पर भी मिला सम्मान
मायके और ससुराल में पाया
नया रूप नयी पहचान
सीधी साधी गृहिणी अब
सुपर वूमेन बन गई है
कभी वो करती काव्यपाठ
कभी संचालिका भी बन गई है
अलग अलग साहित्य वाले
समूह से जुड़ी है
अनजान थी अपनी कला से जो
अब पंखों को फैला कर उड़ी है
मेरे जानने वाले भी
मुझको खुशकिस्मत कहते हैं
जो बीवी से प्यार करें
उनकी खुशी में ही खुश रहते है
✍🏻प्रीति ताम्रकार
जबलपुर

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