वो क्या है दादी,नन्ही रानी, उछल पड़ी।दादी ने कहा _बेटा ,ये जुगनू है।
,इसमें तो कुछ जल रहा दादी और रवि जुगनू के पीछे दौड़ने लगा।शहर में कभी जुगनू नहीं देखा था।
आखिर उसने एक जुगनू पकड़ लिया।दादी ने कहा ,पहले बहुत जुगनू दिखा करते थे,_" एक लंबी श्वास छोड़ते दादी बोली ,जानते हो हमलोग जब छोटे थे तो इससे विश मांगते थे , कि आज हमें स्कूल न जाना पड़े,घर में कोई बीमार पड़ जाए।
पर दादी इसमें से तो लाइट भी जल रही ।
दादी _अब ये पूछो अपने दादा जी से,की क्यों इसमें से लाइट निकलती है ।
दादाजी बताओ न?
मीनाक्षी उठ कर ,चाय के कप रखने चली गई।
दादा जी ने कहा _ चलो ,बच्चे तुमको जुगनू के बारे में बताते हैं,अभी तुम ज्यादा समझ नहीं पाओगे,लेकिन तुम्हारी दादी के दिमाग की बत्ती जल जाएगी ,बेचारी जुगनू को देख विश ही मांगा करती थीं।
सब हंस दिए।मीनाक्षी भी आ गई ।
दादा जी ने दादी को छेड़ते हुए कहा _क्यों मुझे भी तुमने किसी जुगनू से विश में तो नहीं मांगा।
दादी शर्मा गई ,कुछ भी बोलते हो।
बत्ती आ भी गई थी।रवि के हाथ से जुगनू उड़ गया था।
रवि ने कहा ,_दिन में पकड़ लूंगा।
दादा जी हंसने लगे_जुगनू कीट हैं ,ये ज्यादातर शाम और रात में दिखाई देते हैं।
इनमे एक तरह का प्रोटीन पाया जाता है जिसे बायोल्युमिनीसेंस कहते हैं ये ऑक्सीजन के संपर्क से ऑक्सीकृत हो रोशनी पैदा करते हैं।ये रोशनी पीली,नीली,हरी भी होती है।मादा जुगनू के पंख नहीं होते ,जबकि नर जुगनू उड़ते हुए प्रकाशित रहते हैं।
तुमने शहर में इसे देखा था ??
मीनाक्षी में कहा _नहीं पापा ।
दादा जी का शब्द धीमा हो गया ,बोले अब धीरे धीरे ये हमारी नई पीढ़ियों ले लिए इतिहास बन जाएगा।
ये ज्यादातर ,खुले स्थानों,जमीन,पेड़ की छालों,में अपने अंडे देते हैं।इनकी आंखे बड़ी और टांगें छोटी होती हैं।
ये हमारे लिए बहुत लाभदायक है,पेड़ के अंदर छुपे हानिकारक लार्वा,कीट को ये खा लेते हैं।
लेकिन अब ये धीरे धीरे कम होते जा रहे हैं,खर पतवारों,और कीटनाशकों के ज्यादा प्रयोग से ,जंगलों ,पेड़ों के कटने से।मानवीय यातायात बढ़ने से।
रवि आराम से मुंह खोले बातें सुन रहा था।
मीनाक्षी और दादी खाना बनाने चल दी।
रात को सोते वक्त रवि ने कहा ,दादी अब कहानी सुनाने की बारी है।
दादी ने देखा ,रानी को भी नींद नहीं आ रही।
दादी ने कहना शुरू किया।
पुराने समय की बात है ,एक विधवा थी ,उसका एक पुत्र था। विधवा दूसरों के घर बर्तन धो कर घर का खर्च चलाती थी।
जब बुधवा जवान हो गया ,तो उसे मां का काम काज करना अच्छा नहीं लगता।उसने मां से कहा मैं परदेश जाऊंगा ,और वहां से ढेर पैसा कमाऊंगा,फिर हमलोग आराम से रहेंगे।
बुधवा की मां ,नही चाहती थी कि उसका पुत्र उसकी आंखों से दूर हो जाए।
रवि ने कहा _जैसे पापा ,तुमको छोड़ चले गए थे।
दादी ने कहा_हां।
जब नींद आने लगेगी तो बता देना ,मैं कहानी फिर दूसरे दिन सुनाऊंगी ,जल्दी उठना भी तो है।
तुम सुनाओ मैं पूरा सुनकर ही सोऊंगा।
दादी बोली_बुधवा के जिद के आगे उसकी मां ने घुटने टेक दिए।
दूसरे दिन सुबह मां ने बुधवा के लिए रोटी और अचार बांध दिया। बुधवा ने एक ,दो जोड़ी कपड़े गठरी मे बांधे और निकल पड़ा,काम की तलाश में।
पहले ज्यादा आने जाने के साधन नहीं थे,बैलगाड़ी या पैदल ही जाना पड़ता था।
बुधवा चल पड़ा।चलते चलते दोपहर हो गई ।भूख लगने लगी ,सामने एक पेड़ था ,उसी के पास एक कुआं भी था।ये जगह उसे खाना खाने के लिए सही लगी।
वह पेड़ की छाव में बैठ गया।
कपड़े में लपेटी रोटी निकाला ,रोटी की संख्या गिनी ,देखा 7 रोटी हैं।
अब वो सोचने लगा कि,अभी पता नहीं कितना लंबा सफर हो,सारी रोटियां खा लूंगा तो ,फिर आगे सफर में भूखा ही रह जाऊंगा।
इसी सोच विचार में ,वो अपने आप से बातें करने लगा।
एक खाऊं,दो खाऊं,तीन खाऊं
कि सातों खा जाऊं।
इसी उधेड़बुन में वो,बार बार यही दोहरा रहा था।
उसी पेड़ में,सात चुड़ैल रहती थीं।
उन्होंने सुना तो वे डर गईं। छोटी चुड़ैल ,बड़ी चुड़ैल के पास गई ,दीदी ये तो कोई जिन्न,भूत प्रेत आदमी के वेष में लगता है।
इसे पता है , कि हम इस पेड़ पर हैं।ये हम सबको चुन चुन कर खा जाएगा ।अभी फैसला कर रहा है शायद।
दीदी बचाओ ।
बड़ी चुड़ैल ने ढांढस बंधाया ,वो खुद भी डरी थी ,अपनी 2 बहनों को ले वह बुधवा के पास सुंदर स्त्री बन कर गई।
बुधवा अचानक अपने सामने तीन स्त्रियों को देख सकपका गया।
वो कुछ बोलता ,उससे पहले वे बोलीं, हमे छोड़ दो।हमें न मारो ,अब हम किसी को नहीं सताएंगे और उन्हें नहीं मारेंगे।तुम हमसे जो चाहो मांग लो,और हमें इसी पेड़ पर रहने दो।
बुधवा को बात बहुत हद तक समझ में आ गई थी।बुधवा की मां ने समझाया था कि पहले सामने वाले की पूरी बात सुन कर उसका मूल्यांकन करो , वस्तुस्थिति समझ कर ही अपनी बात रखो।
यहां वो समझ गया था कि ये आम स्त्रियां नहीं है ।उसने समझदारी से कहा _मुझे भूख लगी है ,मेरा इन रोटियों से कुछ नहीं होगा ,मुझे तो तुमसब को मारना ही होगा।
नही नहीं_ वे चुड़ैल गिड़गिड़ाने लगीं।
दादी ने कहा _बुधवा ने सोचा ,अगर मैं कोई ऐसी चीज मांग लूं ,जिससे खाने की समस्या दूर हो जाए।
दादी ने देखा रानी सो चुकी थी,और रवि को भी नींद बहुत जोरों से आ रही थी।दादी ने कहा _आज की कहानी खत्म करती हूं,कल सुनना सो जाओ।
क्रमशः

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