गतांक से आगे 👇
अपने पिता को खोकर मृणाल दुखी रहने लगी । जों पिता उसके जीवन के हर सुख-दुख में उसके साथ थे और चाहते थे कि उनकी बेटी हर मौसम में खिलखिलाती रहें , कभी भी उसकी ऑंखो में ऑंसू ना आए । वह पिता आज उसके साथ नहीं थे ।
" मम्मी हमें छोड़ कर बचपन में ही चली गई
पापा आप इस तरह क्यों चले गए
मेरी सारी खुशियां भी साथ ले गए
मुझे रोने का मौसम दें गए "
मृणाल घंटों खिड़की के पास खड़ी होकर पापा के बारे में सोच कर रोती रहती ।
दिन भर आप एसे ही टेसुएं बहाती रहती है और घर का सारा काम मुझे करना पड़ता है । मैं गर्भवती हूॅं जो आराम मुझे करना चाहिए वह दिन भर आप करती रहती है फिर भी आपके भाई मुझे ही दोषी मानते हैं कि मेरी तेज जुबान ने ही आपको दुख पहुॅंचाया है ।
मृणाल का दुख तब और बढ़ गया जब एक दिन उसकी भाभी ( छोटे भाई की पत्नी ) ने उसे कमरे में रोते हुए देखकर कहा ।
मृणाल तों अपने पिता की यादों में ऐसी खो गई थी कि उसे यह भी ध्यान नहीं रहा कि उसकी भाभी गर्भ से है । सच ही तों कह रही है भाभी ! मैं कब तक ऐसे रोती रहूॅंगी । ना खाने की सुध ना ही कुछ और करने की । मैं अपनी जिम्मेवारियों को कैसे भूल गई ??
यह सोचते ही मृणाल की ऑंखो में अपनी जिम्मेदारी की चमक तैरने लगी ।
घर के सारे छोटे - बड़े काम अब पहले की ही भांति मृणाल के ही कंधों पर आ गए । उसकी भाभी की तो ऐश ही ऐश थी । वह जानती थी कि मृणाल उसे काम नहीं करने देगी फिर भी दिखावे के लिए अपने पति के आते ही उसके कदम काम की तरफ बढ़ते ।
इतना सब - कुछ करने के बाद भी घर के कलह कम नहीं हो रहें थे । मृणाल की बढ़ती उम्र और उसकी शादी को लेकर भी घर में हंगामा होने लगा ।
मृणाल का छोटा भाई सब-कुछ जानते हुए भी चुप था क्योंकि अपनी बड़ी बहन द्वारा दी हुई कसम उसे कुछ भी कहने से रोक रही थी । वह अपनी बहन के ऑंसूओं को चाहकर भी पोंछ नहीं पा रहा था ।
" कोई नहीं हैं पापा ! जो मेरे ऑंसू पोछें
बोले बिटिया हम सब कुछ कर लेंगे
पापा बेटी दोनों मिलकर
सुख - दुःख के सारे रास्ते तय कर लेंगे "
मृणाल अब अक्सर गुमसुम रहती । घर के सदस्यों के सामने वह नार्मल रहने की कोशिश करती लेकिन रात में अपनी भाभी और आस पड़ोस की औरतों द्वारा कही बातें उसका पीछा नहीं छोड़ती ।
उसका दिल जोर - जोर से रोने का करता लेकिन वह मजबूर थी । वह तकिए में मुॅंह छुपाकर रोती रहती ।
" इतनी सारी जीवन में तकलीफें है और
पापा आप भी मेरे पास नहीं
आपकी यह बेटी बिल्कुल टूट चुकी है
अब तो मेरे जीवन जीने की भी कोई आस नहीं "
इंडियन आर्मी की बेसिक मिलिट्री ट्रेनिंग सेंटर जिसमे एक सिविलियन को पूरी तरह से बीस हफ्तों में फ़ौज के अनुरूप ढाल दिया जाता है। इस ट्रेनिंग के दौरान जवानों को शारीरिक, मानसिक तथा स्वभाविक रूप से इस तरह मजबूत बनाया जाता है जिससे वह किसी भी परिस्थिति से बेहतर तरीके से खुद निकल सके और दूसरों को भी निकाल सकें । राहुल भी बिल्कुल ऐसा ही बनकर इंडियन आर्मी से निकला है और आज अपने घर एक महीने की छुट्टी में जा रहा है ।
क्रमशः
" गुॅंजन कमल " 💗💞💓

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