रिमझिम बरसात हो 
हाथ में,चाय की प्याली
ऐसी-वैसी चाय नहीं
मुझे भाती है,अदरक वाली 😀

रिमझिम फुहारों को
देखूं मैं ,बारीकियों से 
सौंधी-सौंधी सी खुशबू
भींगे मिट्टी ,जो बूंदों से 🤗

रिमझिम बारिश में
चहूंओर फैले हरियाली
मन प्रफुल्लित, हो उठे
इंद्रधनुष की छटा निराली 🌈

रिमझिम बरसात में
फरमाइश आई पकौड़ियो की
सबने बड़े चाव से खाई
संग चाय के चुस्कियों की  😊☕
💦 ☕ 💦 ☕ 💦 ☕ 💦
                                   

  मनीषा भुआर्य ठाकुर(कर्नाटक)