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शशिकांत एक बहुत बड़ा व्यापारी था, वह गांव और शहर दोनों जगह उसका व्यवसाय अच्छा खासा चल रहा था।उसका एक नौकर था, जो उनके यहां काम करता था।उसका नाम सोमनाथ था, वह दिन रात शशिकांत के खेत खलिहानों की देखभाल करता था।उस के दो बेटे थे।सुरज और आकाश
दोनों पढ़ने में बहुत अच्छे थे। सोमनाथ मजदुरी करके जो कुछ कमाता उससे वह अपना घर चलाता था। और बच्चों को पढ़ाता था। एक दिन उसकी तबीयत खराब हो गई तो उसकी जगह उसके बेटे सूरजऔर आकाश दोनों खेतों में काम करने चले गए, उसी समय शशिकांत उधर से गुजर रहा था,तब उसने पूछा कि सोमनाथ क्यूं नहीं आया?सुरज ने कहा कि पिता जी की तबीयत खराब है इस लिए हम लोग आए हैं शशिकांत ने कहा कि तुम दोनों पढ़ने जाओ,वे दोनों भाई वहां से पाठशाला में पढ़ने चले गए। शशिकांत सोमनाथ के घर पहुंचा तो सोमनाथ खाट पर से उठकर नीचे बैठ गया, और मालिक से कहा कि मालिक आप यहां बैठें, शशिकांत बैठ गया उसने पूछा कि अब तुम्हारी तबीयत कैसी है? उसने उत्तर दिया ठीक हूं साहब! शशिकांत ने फिर कहा बच्चों को शहर पढ़ने के लिए क्यूं नहीं भेजते तब सोमनाथ ने कहा! साहब इतना पैसा कहां है की बच्चों को शहर पढ़ने के लिए भेजे। शशिकांत वहां से कुछ समय बाद चला गया, उसने सोमनाथ के दोनों बच्चों का दाखिला शहर के एक अच्छे विद्यालय में करवाया दिया। और उन्हें अपने साथ शहर पढ़ने के लिए ले गया, दोनों बच्चों ने मन लगाकर पढाई की, और बहुत अच्छा पद प्राप्त किया अच्छे नम्बर से पास हो कर अपने माता-पिता का नाम रौशन किया। सुरज डॉक्टर बना और आकाश जज के पद पर आसीन हो गया। दोनों लङके गांव आकर शशिकांत के पैरों को छूकर आशीर्वाद लिया, और अपने माता-पिता के साथ वही गांव में अस्पताल खोल कर गांव वालों की सेवा करने लगे सोमनाथ ने शशिकांत के घर गया और दोनों हाथों को जोड़कर उसका धन्यवाद 🙏🙏 करने लगा, शशिकांत ने बहुत अच्छा काम किया सभी गांव वाले उसकी प्रशंसा करने लगे।
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समाज में ऐसे कुछ लोग और हो जाएं तो समाज की नींव मजबूत हो जाएगी।
अर्चना पांडेय,, आर्ची
गोरखपुर

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