ऐ खुशी तुम कहाँ मिलती हो,,,
कहाँ है तेरा पता ठिकाना
ऊँचे ऊँचे दुकानों मे
या घर के बने पकवानों मे
ऐ खुशी तुम कहाँ मिलती हो,,,,,
हरे भरे आँगन मे या
बेटियों के खिलखिलाने मे
माँ बाप के चरणो मे
या ईश्वर की भक्ति मे
ऐ खुशी तुम कहाँ मिलती हो,,,,
भाई बहन के संग लड़ने मे
या दोस्तो के साथ टपरी पे चाय पीने मे
खेलने कूदने मे
या पहली बार ईनाम जीतने मे
ऐ खुशी तुम कहाँ मिलती हो,,,
सर्दी की गुनगुनाती धूप मे
या गर्मीयो की ठंडी बयारो मे
सावन की रिमझिम फुहारों मे
या पतझड़ के मौसम मे
बोलो ना खुशी तुम कहाँ मिलती हो,,,,,
जिंदगी के सुख दुख मे
या जिंदगी के उतार चढाव मे
पिया मे या जिया मे
काया या माया मे
प्रकाश या अँधेरा मे
मुनाफा या नुकसान मे
या भूखे को दो रोटी खिलाने मे
कौन सी मोड़ कौन सी गली मे
झोपड़ी या महल.मे
बोलो न खुशी तुम कहाँ मिलती हो,,,,,,
साईकिल की सवारी मे
या चमचमाती कार मे
प्राकृतिक सुंदरता मे
या मन की चंचलता मे
अधरो की मुस्कान मे
या बोलती हुई नयन मे
मोहब्बत या रूसवाई मे
महफिल या तन्हाई मे
तीर्थ स्थल मे या पर्यटक स्थल मे
तपो भूमि मे या देव भूमि मे
खुशी ने खुशी से कहा
मुझसे क्या पूछ रहे हो
मेरा पता ठिकाना
मै तो कण कण मे वास हूँ
जब भी जहाँ भी
तुम मुझे दिल से महसूस करते हो
मै तो हर पल हर क्षण
तुम्हारे आस पास हूँ
शिल्पा मोदी✍️✍️

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