जिंदगी का हर पहलू दिखाता हमें वक़्त है
हों जो हम परेशा कभी तो बहलाता हमें वक़्त है!
दो साथी गर बिछड़ जाएं जीवन के किसी मोड़ पर
उन सच्चे प्रेमियों को फिर मिलाता भी तो वक़्त है!!
तुम रह गए जो तन्हा तो घबराने कि क्या बात है
तन्हाइयों को झेलना सिखाता भी तो वक़्त है!
क्या हुआ जो आज यूं गलतफहमी कुछ हो गईं
सही वक्त आने पे इसको मिटाता भी तो वक्त है!!
'निर्दोष' हो तुम फिर क्यों हो जिंदगी से यूं कटते
बुझी शमा को फिर से रोशन बनाता भी तो वक़्त है!
मिल ना पाते हों आज जो किसी भी वजह से उन
एहसासों को जज्बातों से मिलाता भी तो वक़्त है!!
सतीश निर्दोष
रेवाड़ी (हरियाणा )

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