भारतीय सेना की फॉरवर्ड पोस्ट ४०२३, जो बांदीपुरा जिले के गुरेज़ सेक्टर में एलओसी पर स्थित एक महत्वपूर्ण पोस्ट है, यहाँ लद्दाख स्काउट्स की नौंवी बटालियन की पाँचवीं रेजिमेंट के दो प्लाटून तैनात हैं, इसकी कमान संभाल रखी है कैप्टन वांगचुक ने और इसमें उनका साथ देते हैं लेफ्टिनेंट चामलिंग और लेफ्टिनेंट त्सेरिंग। इस पोस्ट से लगभग ४-५ किलोमीटर की दूरी पर गुरेज़ नगर के बाहरी क्षेत्र में सेना का बेस है, यहाँ लद्दाख स्काउट्स और ४४ राष्ट्रीय राइफल्स के ५०० जवान रहते हैं। इन्हें बारी-बारी एलओसी पर गश्त के लिए अलग-अलग टुकड़ियों में भेजा जाता है।
ग्रीष्म ऋतु के आगमन ने उनके काम को और कठिन बना दिया है क्योंकि बर्फ पिघलने से वे सभी रास्ते खुल जाते हैं जहाँ से घुसपैठ संभव है। इसीलिए सेना ने गश्त की संख्या बढ़ा दी है, आज लद्दाख स्काउट्स के ब्रावो-वन की बारी है। इस दल में २२ जवान हैं जिनका नेतृत्व लेफ्टिनेंट तेनज़िंग कर रहे हैं। यह दल अपने बेस कैम्प से लगातार संपर्क में है,
"ब्रावो-वन टू बेस , सेक्टर-३ क्लियर है अब हम सेक्टर-४ की ओर जा रहे हैं।"
"कॉपी ब्रावो-वन, इंटेल है कि घुसपैठ की कोशिश हो सकती है सावधान रहना, बेस आउट।"
" रॉजर बेस, ब्रावो-वन आउट।"
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शाम के ७ का समय होगा , पोस्ट पर तैनात जवान चाय पी रहे हैं; हंसी-मजाक कर रहे हैं, तभी बंकर-३ के बाहर खड़े एक जवान के कान से टकराती हवा अपने साथ सनसनाहट की आवाज लेकर आई, उस जवान को यह समझने में देर नहीं लगी कि यह आवाज किसकी है। पाकिस्तानी सेना ने भारतीय पोस्ट पर एक तोप का गोला छोड़ा था; यह उसी की आवाज थी। वह जवान बंकर से अधिक दूर नहीं था फिर भी उसने अपनी पूरी शक्ति लगाकर बंकर की ओर दौड़ लगा दी और अपने साथियों को सावधान किया।
" इनकमिंग "
एलओसी के उस पार से तोप का गोला पोस्ट पर आकर गिरा, उसके जोरदार धमाके से पोस्ट से दो किलोमीटर दूर गाँव में टीवी पर क्रिकेट वर्ल्डकप में भारत पाकिस्तान का मैच देख रहे लोग भी हिल गए, कुछ तो कम्पन के प्रभाव से गिर भी गए।
" सीज़ फायर के नियमों का उल्लंघन, फिर से। ये पाकिस्तानी सुधरने वाले नहीं हैं। " एक सैनिक अपनी राइफल संभालते हुए बड़बड़ाया।
इसके बाद एक-एक करके तोप के गोले पोस्ट पर गिरने लगे जिनके विस्फोट से उत्पन्न शॉकवेव के कारण पर्वत भी हिलने लगे तो मनुष्यों की बात क्या करें। एलओसी के पास रहने वाले ग्रामीण अपना जीवन बचाने बंकरो की ओर भागने लगे। उधर पोस्ट की कमान संभाले कैप्टन ने अपने जवानों को जवाबी कार्रवाई करने के लिए कहा, " जवानों इन नामुरादों को सबक सिखाओ।
उसके आदेश का पालन हुआ, पाकिस्तानी पोस्ट पर १०५ एमएम के मोर्टार शेल्स की बरसात होने लगी और एक सिपाही अपनी कार्ल गुस्ताव रॉकेट लॉन्चर से बंकरों को निशाना बनाने लगा। शेष सैनिक अपनी राइफल्स और मशीन गन्स से गोलियाँ बरसाने लगे। भारत के इस प्रत्युतर से पाकिस्तानी पोस्ट को बहुत हानि हुई, उनके तीन बंकर नष्ट हो गए; चार सिपाही गंभीर रूप से घायल हो गए और एक मारा गया।
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पाकिस्तानियों की ये खराब आदत है वे न केवल एल.ओ.सी. अपितु इसके आसपास बसे गाँवों पर भी शेलिंग करते हैं, जिसमें निर्दोष सिविलियन भी मारे जाते हैं। आज भी वे अपनी तोपों की रेंज में आने वाले पूरे क्षेत्र पर गोले बरसा रहे थे जिसके कारण जंगल में पेट्रोलिंग कर रही ब्रावो-वन के जवान अपनी गश्त रोककर शेलिंग से बचने के लिए बनाए गए शेल्टर की ओर दौड़ पड़े, उनका सौभाग्य कि वे एक शेल्टर के निकट ही थे तो उन्हें अधिक भागना नहीं पड़ा। कुछ ही मिनट बाद उनके ठीक सामने एक गोला गिरा, लेफ्टिनेंट तेनज़िंग ने अपने जवानों से कहा, " जवानों आज की रात हम बेस पर नहीं बिता पाएँगे।"
वे सभी आपस में बातें कर रहे थे तभी बेस कैम्प से सन्देश आया, "ब्रावो-वन ,पोस्ट ४०२३ पर शेलिंग की जा रही है यह घुसपैठ की कोशिश हो सकती है तुम्हें तैयार रहना होगा …… बेस आउट।"
" कॉपी बेस, हम तैयार हैं उनके लिए ……. ओवर एंड आउट। " लेफ्टिनेंट तेनज़िंग ने उत्तर दिया।
पाकिस्तान की ओर से लगातार हो रही शेलिंग अब बढ़ने लगी थी, उनके तोपों से निकलने वाले गोले भारतीय सीमा पर तबाही मचा रहे थे जवाब में भारतीयों द्वारा दागे गए मोर्टार के गोले केवल पाकिस्तानी पोस्ट तक ही मार कर रहे थे, आर्टिलरी पोजीशन अभी भी उनकी पहुँच से दूर थी, उन्हें आवश्यकता थी आर्टिलरी सपोर्ट की, जिसके लिए भारतीय सेना के पास एक नया हथियार था "धनुष होवित्जर"। तो कैप्टन ने गुरेज में तैनात आर्टिलरी रेजिमेंट की यूनिट से रेडियो पर संपर्क किया।
" विक्टर-५ टू आरटी-०६ …… कम इन ……ओवर ……"
" … कम इन विक्टर-५ …… पास योर मैसेज ओवर …… "
" … आरटी-०६ … पाकिस्तानियों के हमले का प्रत्युत्तर देने के लिए हमें तुरंत आर्टी सपोर्ट की आवश्यकता है …… डू यु कॉपी? "
" कॉपी विक्टर-५ … मारना कहाँ है यह बताओ ….ओवर …"
" रॉजर आरटी-०६ …… निर्देशांक नोट करो ……"
विक्टर-५ से निशाना मिल जाने के बाद तोपचियों ने अपनी तोपों को घुमा कर उनका मुँह उस दिशा में कर दिया जहाँ से पाकिस्तानी तोपें गोले बरसा रही थीं, फिर निशाना बिल्कुल सही जगह लगे इसके लिए तोपों को एडजस्ट किया। अब समय है धमाका करने का। मुख्य तोपची के संकेत पर एक तोपची ने तोपों में गोला भरा; दूसरे तोपची ने लीवर खींचा। फायरिंग पिन की टक्कर से प्राइमर जला जिससे बनी चिंगारी ने बारूद को जलाया; उसकी गर्मी से शेल फैलने लगा और बारूद के जलने से अंदर गैस बनने लगी, यह गैस बाहर निकलने को आतुर थी पर उसे कोई जगह नहीं मिली तो उसने गोले को धक्का देना शुरू किया। शेल के फैलने से गोले पर उसकी पकड़ ढीली हो गई थी जिसके कारण गोले ने उसका साथ छोड़ दिया और बैरल के अंदर घूमते हुए जोरदार आवाज के साथ वह १५५ एमएम का गोला बाहर निकल गया। कुछ सेकेंड के बाद एलओसी के उस पार से एक जोरदार आवाज सुनाई दी जो भारतीयों द्वारा दागे गए गोले के विस्फोट की थी।
पोस्ट ४०२३ पर एक सिपाही अपनी दूरबीन से धनुष द्वारा दागे गए गोले कहाँ गिर रहे हैं यह देख रहा था, निशाना बताने का काम भी वही कर रहा था, उसने बताया, गोले ने पाकिस्तानी आर्टिलरी पोजीशन को हिट किया है रेडियो पर पाकिस्तानियों की बातें सुनने पर पता चला कि इस हमले में उनका हथियार डिपो का कुछ भाग क्षतिग्रस्त हो गया। इसके तुरंत बाद ही पाकिस्तानी सीमा में दूसरा गोला गिरा इसने एक तोप को बेकार कर दिया और उसके तीन तोपचियों को अल्लाह के पास भेज दिया उसी तोप के दो तोपची गंभीर रूप से घायल हो गए। इन तोपों ने भारतीय सीमा में बहुत उत्पात मचाया था अब उसका प्रतिफल उन्हें मिल रहा था। धनुष होवित्जर से लगातार गोले छूटने लगे और पाकिस्तानी तोपों को शांत करने लगे।
इस आक्रमण से पाकिस्तानियों की आर्टिलरी पोजीशन को बड़ा नुकसान पहुँचा उनकी तोपें और उनके हथियार रखने की जगह सब नष्ट हो गए अब वहाँ से और गोले नहीं बरसा पाएँगी। पर यह सब अभी समाप्त नहीं हुआ था ऐसा लगता है क्योंकि पाकिस्तान की ओर से १५ लोग एलओसी पार करके भारतीय सीमा में घुस गए, इनकी वर्दी से पता चल रहा था कि ये पाकिस्तान की कुख्यात बॉर्डर एक्शन टीम के लोग हैं जिसमें वेतनभोगी सैनिकों के साथ-साथ आतंकवादी भी होते हैं। ऐसी ही एक टीम ने एलओसी पार करके हमारे दो जवानों का सिर काट दिया था। क्या आज भी वैसा ही कुछ होने वाला है, हे ईश्वर रक्षा करना।
जहाँ से उन्होंने घुसपैठ की थी उस जगह भारतीय सेना की कोई पोस्ट नहीं थी और न ही कोई पेट्रोलिंग पार्टी उस समय वहाँ गश्त लगा रही थी, पर यहाँ स्थान-स्थान पर मोशन सेंसर्स लगाए गए थे। उनकी यह घुसपैठ सेंसर्स से छिपी न रह सकी, इलेक्ट्रॉनिक सिग्नल के रूप में घुसपैठ की सूचना पोस्ट पर पहुँच गई।
" कैप्टेन सेक्टर-५ के मोशन सेंसर्स ने कोई हरकत पकड़ी है; लगता है घुसपैठ हुई है," सेंसर्स से मिलने वाले फीडबैक का विश्लेषण करने वाले एक सिपाही ने कैप्टन को संभावित घुसपैठ के बारे में सूचना दी।
उसकी इस सूचना की पुष्टि करने के उद्देश्य से कैप्टन वांगचुक ने एक टुकड़ी भेजने का निर्णय किया, उसने लेफ्टिनेंट चामलिंग को बुलाकर उससे कहा, " लेफ्टिनेंट सेक्टर-५ में मोशन सेंसर्स में हरकत हुई है। एक प्लाटून ले जाकर जाँच करो।"
लेफ्टिनेंट चामलिंग उसकी बात से सहमत नहीं था, उसने कैप्टन को अपनी बात बताई, " साहब जी सेक्टर-५ के पास ही लेफ्टिनेंट तेनज़िंग की ब्रावो-१ पेट्रोलिंग कर रही है, मेरा विचार है कि इस घुसपैठ की जाँच करने हेतु उन्हें भेजना उचित होगा। यदि हम चले गए तो पोस्ट की स्ट्रेंथ कम हो जाएगी।"
कैप्टन वांगचुक को लेफ्टिनेंट चामलिंग की बात उचित लगी, " ठीक कहते हो लेफ्टिनेंट हम ब्रावो-१ को ही भेजेंगे। तुम जाओ और आर्टिलरी रेजिमेंट को निशाना बताने में मदद करो।"
"जी साब, " लेफ्टिनेंट ने उसे सेल्यूट किया और वहाँ से चला गया। उसके जाने के बाद कैप्टन वांगचुक ने लेफ्टिनेंट तेनज़िंग को रेडियो पर संदेश भेजा।
" ब्रावो-१ दिस इस विक्टर-५ …… डू यू कॉपी ओवर?"
" कॉपी विक्टर-५ गो अहेड ओवर …… "
" सेक्टर-५ के मोशन सेंसर्स में कुछ हरकत हुई है, तुम जाकर जाँच करो कि कहीं घुसपैठ तो नहीं हुई …… कोई घुसपैठिया मिले तो मार देना और हाँ रेडियो पर सम्पर्क में रहना। "
" एकनॉलेज विक्टर-५ …… घुसपैठी यहाँ से जीवित वापस नहीं जाएंगे …… ब्रावो-१ आउट। "
" रॉजर ब्रावो-१ …… तुमसे यही आशा है …. ओवर एंड आउट। "
विक्टर-५ से बातचीत समाप्त कर जब लेफ्टिनेंट तेनज़िंग अपने जवानों की ओर मुड़े तब उसके एक सिपाही ने उत्सुकतावश उससे पूछा, " साहब क्या कहीं घुसपैठ हुई है आपने बातचीत में घुसपैठी शब्द का प्रयोग किया था? "
उसके उत्तर में लेफ्टिनेंट ने वही कहा जो उसे विक्टर-५ ने बताया था। " हाँ जवानों सेक्टर-५ में घुसपैठ हुई है हमें वहाँ जाकर जाँच करनी है और यदि कोई घुसपैठिया मिलता है तो उसे वहीं पर मार देना है", लेफ्टिनेंट तेनज़िंग ने अपनी प्लाटून को ब्रीफ करते हुए कहा।
" मेरी राइफल कब से मचल रही है किसी घुसपैठिए को मारने को, अब इसे चैन मिलेगा। " उस सैनिक ने अपनी इंसास राइफल पर अपनी उँगलियाँ फेरते हुए कहा।
" हाँ पर ध्यान रहे कोई भी हीरो बनने का प्रयास नहीं करेगा। अब चलो सेक्टर-५ की ओर। " लेफ्टिनेंट ने अपने सैनिकों को सावधान करते हुए कहा।
सेक्टर-५ में बैट के घुसपैठी पेड़ों, झाड़ियों और चट्टानों की आड़ में छिपे बैठे थे, लगता है वे किसी की प्रतीक्षा कर रहे थे।
" अब तक हिंदुस्तानियों को हमारी घुसपैठ का पता चल गया होगा। सब तैयार है? " मेजर राशिद जो इस घुसपैठ का नेतृत्व कर रहा था उसने अपने लेफ्टिनेंट से पूछा।
लेफ्टिनेंट उस्मान ने मेजर को बताया, " जी जनाब हमारे लोग अपनी-अपनी पोजीशन पर जमे हुए हैं, जैसे ही हिंदुस्तानी इधर आएँगे हमारे एम्बुश में फँस जाएँगे। "
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ब्रावो-१ सेक्टर-५ में बैट के एम्बुश से अनभिज्ञ थी पर यह जानते थे कि यदि घुसपैठ हुई है तो घुसपैठिए जंगल में कहीं भी छिपे हो सकते हैं इसीलिए वे हर प्रकार से सावधान थे, विशेषकर लेफ्टिनेंट तेनज़िंग, सेक्टर-५ में प्रवेश करने के पहले सबसे आगे चल रहे लेफ्टिनेंट तेनज़िंग ने अपना दायाँ हाथ उठाकर प्लाटून को रुकने का संकेत किया। उसके पीछे चल रहे सभी जवान अपनी-अपनी जगह पर रुक गए फिर लेफ्टिनेंट ने सबको कवर लेने को कहा और अपने दो सिपाहियों को बुलाकर उन्हें कुछ निर्देश दिए जिसके बाद उन दोनों ने अपने बैग से कुछ निकाला। उनके हाथ में दो ब्लैक होर्नेट ड्रोन थे, अब तक का सबसे छोटा ड्रोन पर काफी कारगर। बड़े ड्रोन जहाँ नहीं पहुँच सकते वहाँ यह काम आता है। शत्रु को पता चले बिना उसकी हर हरकत पर नजर रखता है यह।
दोनों ड्रोन जंगल के ऊपर उड़ते हुए सेक्टर-५ को स्कैन करने लगे।
सार्जेंट कुरैशी भारतीय सैनिकों के आने की सूचना देने के लिए एक पेड़ पर चढ़ गया था, यहाँ से गुजरने वाले हर किसी को वह देख सकता था। काफी देर से पेड़ की डाल पर बैठे-बैठे वह ऊब गया था और ऊँघने लगा था तभी उसे भवँरे के पंख फड़फड़ाने जैसी आवाज सुनाई दी जिससे वह चौंक गया और हड़बड़ा गया।
"क्या हुआ सार्जेंट? "
" कुछ नहीं जनाब ऐसा लगा जैसे मेरे ऊपर से उड़ने वाली कोई चीज गुजरी है।"
"कोई कीड़ा होगा तुम होशियार रहो जैसे ही सामने से हिंदुस्तानी आएं तो तुरंत खबर करना।"
"जी जनाब। "
यह किसी कीड़े की नहीं ब्लैक होर्नेट ड्रोन की आवाज थी जो उस पेड़ के ऊपर से गुजरा था, उस ड्रोन ने पेड़ पर बैठे कुरैशी को देख लिया था और उसके माध्यम से ब्रावो-१ ने भी।
" सर देखिए पेड़ पर कोई है।" सिपाही ने लेफ्टिनेंट को ड्रोन से मिल रहा वीडियो दिखाते हुए कहा।
लेफ्टिनेंट तेनज़िंग ने ध्यान से वीडियो देखा, कुरैशी की वर्दी से वह पहचान गया कि यह बैट का सदस्य है और यह अकेला तो आएगा नहीं इसीलिए उसने अपने सिपाही से कहा, " ड्रोन को थोड़ा और आगे भेजो देखें तो क्या मिलता है।"
थोड़ा और आगे जाने पर ड्रोन ने पेड़ के पीछे छिपे हुए दो सिपाहियों को देख लिया दूसरे ड्रोन ने भी चट्टान के पीछे कवर लेकर बैठे हुए एक सैनिक को देख लिया। दोनों ड्रोन्स ने पूरे क्षेत्र का चक्कर लगाया तो उन्हें अंग्रेजी के एक वर्ण "यू" के आकार में पोजीशन लिए हुए कुछ लोग दिखे।
" हे भगवान! यह तो एम्बुश है। तो इसीलिए पाकिस्तानी आज इतनी शेलिंग कर रहे हैं लगता है यह लोग २६ अक्टूबर २०१६ वाली घटना को दोहराना चाहते हैं। "
" और साहब ये लोग हमसे बस २०० मीटर की दूरी पर हैं पर घने जंगल और अंधकार के कारण वे हमें देख नहीं पा रहे हैं और न ही हम। " ड्रोन चला रहे एक सिपाही ने कहा।
लेफ्टिनेंट ने सबको अपने पास बुलाया और उन्हें घुसपैठियों से निपटने की योजना समझाने लगा। योजना के अनुसार ब्रावो-१ के सभी जवान तीन समूहों में बँटकर बैट के एम्बुश के किनारे से होते हुए उसके पीछे आ गए। सारा काम इतनी शांति से हुआ कि बैट को भनक भी नहीं लगी। बैट के यू आकार के एम्बुश के पीछे ब्रावो-१ भी यू आकार बनाकर खड़ी हो गई, लेफ्टिनेंट की योजना थी कि उन पर पीछे से सरप्राइज अटैक किया जाए।
ब्रावो-१ में दो स्नाइपर्स भी थे लेफ्टिनेंट तेनज़िंग ने उन्हें किसी ऊँची जगह पर कवर लेने को कहा और शेष सैनिकों को पेड़ो और चट्टानों के पीछे छिपा दिया। सभी लेफ्टिनेंट के आदेश की प्रतीक्षा कर रहे थे।
" सर होस्टाइल मेरे निशाने पर है, "स्नाइपर राइफल संभाले हुए बी-१-६ ने कहा।
"ठोक दो"
स्नाइपर राइफल से गोली चली और सीधा सार्जेंट कुरैशी के दिल में जाकर लगी, उसकी आत्मा ने उसी समय शरीर का साथ छोड़ दिया और निर्जीव शरीर धप्प की आवाज के साथ धरती पर गिर गया। राइफल में साइलेंसर लगा था इसीलिए किसी को भी गोली चलने की आवाज सुनाई नहीं दी।
" जीरो-५ कम इन ओवर," धप्प की आवाज सुनकर मेजर राशिद ने सार्जेंट कुरैशी से संपर्क करने का प्रयास किया पर उसे कहाँ पता कि कुरैशी संपर्क से बाहर हो गया है वह भी सदा के लिए। बार-बार रेडियो पर आवाज देने पर भी कुरैशी की ओर से कोई उत्तर न आने पर राशिद ने अपने एक सिपाही को कुरैशी के पास भेजा।
" जीरो-३ …… जीरो-५ जवाब नहीं दे रहा है तुम उसके पास जाकर देखो क्या हुआ है रेडियो चालू रखना। "
" जी जनाब।"
जब राशिद परेशान हो रहा था तब ब्रावो-१ बहुत ही कम आवाज करते हुए उसके लगाए एम्बुश की ओर थोड़ा और आगे बढ़ गए। जब जीरो-३ जिस पेड़ पर कुरैशी बैठा था वहाँ पहुँचा तो उसने अपनी राइफल में लगी टॉर्च के प्रकाश में औंधे मुँह पड़े कुरैशी के शव को देख लिया वह घबरा गया उसने तुरंत रेडियो पर राशिद को सूचना दी, "जनाब …. कुरैशी ..……"
पर इसके पहले वह अपनी बात पूरी कर पाता एक स्नाइपर ने उसे सदा के लिए चुप करा दिया, गोली उसके गले में लगी थी जिससे उसके रीढ़ की हड्डी से मस्तिष्क का संपर्क कट गया था। वह भी किसी कटे पेड़ के समान जमीन पर लमलेट हो गया।
मेजर राशिद समझ गया कि किसी ने उसे गोली मारी है पर इससे पहले की वह कोई प्रत्युत्तर दे पाता लेफ्टिनेंट तेनज़िंग ने रेडियो पर अपने सभी जवानों को आक्रमण का आदेश दे दिया।
की की सो सो लार ग्यालो का जयघोष करते हुए ब्रावो-१ के सैनिक बैट पर टूट पड़े। पीछे से भी उन पर वार हो सकता है यह पाकिस्तानियों ने सोचा नहीं था, इसीलिए इस सरप्राइज अटैक से वे घबरा गए, उनकी सारी तैयारी धरी रह गई। फिर भी हमले का जवाब तो देना ही था।
मेजर राशिद और उसकी टीम ने जमकर मुकाबला किया पर एक तो उनकी संख्या कम थी ऊपर से उनका मनोबल पाताल से भी नीचे चला गया था। लगभग दो घंटे तक यह मुठभेड़ चली, एक-एक करके सारे घुसपैठी मारे गए।
" बेस सभी घुसपैठियों को मार गिराया गया है।"
"बहुत अच्छे ब्रावो-१ कोई कैजुअल्टी? "
"नहीं बस हमारे तीन जवान घायल हो गए हैं पर उन्हें गंभीर चोटें नहीं आई हैं हमारे टीम का मेडिक उनकी मरहम पट्टी कर रहा है ओवर।"
"अच्छी बात है, उनकी मरहमपट्टी होते ही बेस पर लौट आओ…… ओवर एंड आउट।"
"रॉजर बेस ओवर एंड आउट। "
" साहब एक बात मुझे समझ नहीं आई? " एक सिपाही ने लेफ्टिनेंट तेनज़िंग के समक्ष शंका व्यक्त करते हुए उससे पूछा।
" कौन सी बात सिपाही नुरुगु? "
" यही कि जब बैट के लोग सरलता से हमारी किसी पोस्ट पर या किसी पेट्रोलिंग पार्टी पर हमला कर सकते थे तो वे यहाँ एम्बुश लगाकर क्यों बैठे थे?"
उसकी यह बात सुनकर लेफ्टिनेंट तेनज़िंग भी सोच में पड़ गया क्योंकि उस सिपाही ने जो कहा वह उचित ही था।
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सेक्टर-२ में भारतीय सीमा के अंदर एलओसी से बिल्कुल समांतर एक खाई थी, इस के बीच एक पहाड़ी नदी बह रही थी जो ग्लेशियर के पिघलने से बनी थी। जब भारतीय सैनिक पाकिस्तान के हमले और बैट की घुसपैठ का जवाब देने में व्यस्त थे तब रात के अंधेरे में इस खाई से एक-एक कर १२ लोग निकले। इन लोगों ने किसी भी प्रकार की वर्दी नहीं पहनी थी पर सभी लोग पूरी तरह शस्त्र सज्जित थे उनके हाथों में थी एके राइफल की चाइनीज़ नकल टाइप-५६ राइफल और हैंडग्रेनेड साइड आर्म के रूप में ग्लोक-१७ पिस्तौल सबकी कमर में बंधी बेल्ट से जुड़ी हुई थी और सबने अपनी पीठ पर बड़े-बड़े बैग लाद रखे थे जिसमें या तो और भी हथियार होंगे या खाने का सामान होगा। इस प्रकार घुसपैठ तो आतंकवादी करते हैं यानी बैट यह शेलिंग और बैट की घुसपैठ इनकी घुसपैठ से ध्यान हटाने के लिए हुई थी।
उन आतंकवादियों में से एक; खाई पार करने में हुई मेहनत झेल नहीं पाया था, उसकी चाल देख कर लग रहा था कि वह बहुत थक गया है। ऐसे में जब उसके पैर के नीचे पत्थर आया तो उसका संतुलन बिगड़ गया और वह पीठ के बल गिर गया, जब वह गिरा तो ऐसे गिरा कि उसका बैग खुल गया और उसमें से एक तोप का गोला निकला जिसे एक ट्रिगर मैकेनिज्म से जोड़ा गया था। इस पूरे तामझाम को I.E.D. कहते हैं। तोप के गोले पर पीले रंग की पृष्ठभूमि पर काले रंग से एक वृत्त बना हुआ था उसके केंद्र में एक और छोटा वृत्त बना था उससे तीन काली पट्टियाँ निकली हुई थीं, पट्टियों के छोर पर भी तीन काले रंग के छोटे वृत्त बने थे।
इस आकृति का अर्थ है कि वह तोप का गोला एक रासायनिक हथियार था, वेपन ऑफ मास डिस्ट्रक्शन और यही है डर्टी बॉम्ब।
आतंकवादियों के पास रासायनिक हथियार कहाँ से आ गए ?
इस बार वे कहाँ हमला करने वाले हैं ?
क्या वे अपने उद्देश्य में सफल हो जाएँगे?
इन सभी प्रश्नों के उत्तर हमें मिलेंगे धारावाहिक के अगले भाग में………

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