खुराफातों को दिमाग में अब मत आयाम दो,
 इस जहां को एक नया अब पैगाम दो।

 कैद हो घरों में अपनी करतूतों से ,
अब तो कुदरत के कामों में ना खलल ऐ आम हो।

पानी बिका हवाएं बिकी क्या-क्या ‌ ना बिकेगा,
रोको इस खरीद-फरोख्त कोतभी कुछ और काम हो।

 आंखों पर चश्मे ,मुंह देखो मास्क से बंधे हुए,
 कैसे जाओगे खुदा के घर जब दिलों में कत्लेआम हो ।

लगा दो जाकर 'सीमा' 'काला टीका कुदरत के माथे पर
 इंसान की वजह से खुदा तो ना बदनाम हो।