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बड़ी हसरत से सजायी थीं मेरी पलकों ने तेरे प्यार की सपने
मिल गयीं खाक़ में हर ख्वाहिश मेरी छोड़ गए जो थे अपने
हर पल जिसके साथ गुजारा गम हो या खुशियों में
बेदर्दी समझ ना सका चाहत को मेरी कर गया दिल के कई टुकड़े...!!
आईना भी देखती हूँ तो खुद पर तरस आती हैं मुझे अपनी हालत पर
कुछ दिन के मेहमान थीं वो खुशी सोच कर आँख भर आती हैं
क्या थीं मैं पहले क्या से क्या बन गयीं दीवानगी में तेरी
बेदर्दी समझ ना सका चाहत को मेरी कर गया दिल के कई टुकड़े...!!
तेरे होते होते सबसे दूर होती गयीं जो भी थे मैं अपनों से
तूने भी साथ छोड़ दिया मेरी थाम लिया हाथ गैरों के
क्या भूल थीं मेरी या गुनाह था तुमसे दिल लगाना मेरा
जो कद्र ना कर सका मोहब्बत को मेरी कर गया दिल के कई टुकड़े...!!
भाया नहीं तुझे मेरी आँखों की मस्ती या मेरी हँसी तुझे खल गयीं
ईस तरह दे गया जख्म की ताउम्र मुस्कुरा ना सकूँगी आँखों में लिए नमी
क्यूँ ना देखा झाँक कर मेरी आँखों की गहराई में अपने लिए प्यार को
बेदर्दी समझ ना सका चाहत को मेरी कर गया दिल के कई टुकड़े...!!
साथ नहीं निभाना था तुझे तो प्यार की कसमें भी नहीं खाते
जाना ही था गम के अंधेरों में छोड़ कर तो मेरी ज़िन्दगी में ही कभी नहीं आते
क्या मिल गया मुझे इतना दिल में दर्द देकर या नैना की प्यार रास ना आयी
बेदर्दी समझ ना सका प्यार को मेरी कर गया दिल के कई टुकड़े....!!
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नैना...✍️✍️

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