मैं हूँ तेरी दीवानी मनमोहन मुरली वाले
मझधार में है नैया इसे पार तू लगा दे
तेरी चौखट पे मनमोहन, बीते सारा जीवन
दिल में तस्वीर हो तेरी,होठों पे तेरा सुमिरन
श्याम श्याम रटते करूँ हर साँस तेरे हवाले
मैं हूँ तेरी दीवानी.......
सुनते नहीं मोहन, जो अर्जी हमारी है
रहे नजर दया की बस,पर मर्जी तुम्हारी है
अब सुन भी लो ये विनती, सबकी सुनने वाले
मैं हूँ तेरी दीवानी......
तुझे अब छोड़कर मोहन,बता जाऊँ मैं किस दर
आई लेने शरण तुम्हारी,खाके जमाने की ठोकर
जो तुमने ठुकरा दिया तो भँवर से कौन निकाले
मैं हूँ दीवानी तेरी.....
नेहा शर्मा

0 टिप्पणियाँ