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कभी तुझे खास मौके पर बुलाऊँ तब चले आना
कभी तुझे परेशानियों में याद आऊँ तो चले आना!
गुलदस्तों का मोहताज नहीं रहा मैं कभी रिश्तों में
तेरे पास कुछ ना हो भले,खाली हाथ चले आना!!
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ना भूलना कभी याद करना,मुझको भी याद आना
बात जो दिल मे है तेरे,उसे मुझसे क्यों छुपाना!
अपना-पराया सबकी ख़ातिरदारी होती है मेरे घर मे
तेरा कोई खास हो तो उसे भी अपने साथ लेते आना!!
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मैंने तो लिख दिया है नाम तेरा दिल पर चाहें तू मिटाना
तुझपे भरोसा है नही बदलेंगी,बदले चाहें लाख जमाना!
हर महीनें हफ्ता ले जाती है जुगनुओं की बिरादरी मुझसे
तुझे डर क्यों है अँधेरे से वो रौशनी ना दे तो मुझे बताना!!
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छोड़ा था जहाँ वही मिलूँगा खड़ा तू लौट कर आना
लोगों ने कहा ना इश्क करना इससे ना दिल लगाना!
मोल-भाव नही करता मैं कोई सौदागर नही इश्क़ का
तुझसे की है मोहब्बत कोई नुकसान से क्यों घबराना!!

:- राजेश शेखावत { B+ }✍️✍️✍️