कृष्णा और मोहन दोनों एक-दूसरे के सुख दुख के साथी बन चुके हैं। मोहन पढ़ाई के साथ साथ बाबा की भी मदद करता था। कृष्णा की उम्र भी थकने लगी थी।
मोहन ने कहा बस कुछ दिन और फिर आपको कोई काम नहीं करने दुंगा।
कृष्णा कहता तु मेरी चिंता मत कर। अपनी जिंदगी की ऊंचाई छुओ।
आपने सारी जिंदगी मुझे सम्हालने में लगा दी। मुझे जरा भी बुखार आता था।आप मेरी फ़िक्र में रातभर जागकर मेरी देखभाल करते थे।
अच्छा बाबा तु जीता मैं हारा।
बाबा तो आप ही हो मैं तो केवल तुम्हारा बेटा हूं।
उनका नहीं जिन्होंने मुझे नदी किनारे छोड़ दिया था।
मैंने तुम्हें इसलिए बताया था ।तुम्हें सच्चाई का पता रहना चाहिए।
हां बाबा तुम से ही मेरी पहचान हो।
मोहन तुम मेरे ही बेटे हो। आगे से कभी ना कहना।
यह कहकर दोनों एक-दूसरे के गले लग गये।
मौसम बदल रहे हैं ऋतूए बदल रही है। मोहन और मोहिनी दोनों योवन की उम्र की दहलीज पर कदम रख रहें हैं।
दोनों पढ़ाई कर अपना अपना मुकाम हासिल करने का प्रयास कर रहे हैं।
मोहन का नयुरो सर्जन बनने का सपना है ।
एक दिन कृष्णा ने मोहन को बोला।
बेटा कोई ऐसी विशिष्ट सर्जरी भी होती है जिससे रंग साफ हो जाए।
मोहन ने कहा, बाबा आज आपको इस रंग से परेशानी हुई है। आप तो हमेशा मेरा आत्मविश्वास बढ़ाते आए हो। आज आप इस सावला रंग को गोरे रंग में क्यों तब्दील करना चाहते हैं।
यह तो गॉड गिफ्ट है जो भगवान ने हमें रंग दिया है नहीं हमारे लिए सही है कुछ सोच समझकर ही प्रभु ने दो रंग बनाए हैं। यदि सावला रंग ना हो तो गोरे रंग की भी कोई पहचान ना होगी।
नहीं मोहन तुम गलत समझ रहे हो तुम्हारे पास तो मैं हूं तो मैंने तुम्हें समझा दिया लेकिन कुछ बदनसीब मेरे जैसे भी होते हैं जिनको इस रंग के कारण बहुत शर्मिंदगी सहनी पड़ती है।
बाबा यह तो सब को समझना होगा यह प्रभु की माया है और प्रभु ने ही हमें इसके लिए चुना है हमने कोई अपने आप से कोई रंग नहीं चुनते हैं।
और भगवान की दी हुई चीज कभी बुरी नहीं होती। इसलिए जो जैसा है उसको उसी में ही संतुष्टि करनी चाहिए। कुछ सोच समझकर ही प्रभु भी इस कार्य को करते होंगे।
अच्छा मोहन मैं आगे से कभी इस विषय में बात नहीं करूंगा तुमने बिलकुल सही कहा है। आज तक तो मैं तुम्हें समझाता था ।आज तुमने मुझे समझाया मुझे बहुत अच्छा लगा कि तुम अपने रंग को लेकर अब जरा भी चिंतित नहीं हो।
यह सब तो बाबा आपके संस्कार हैं। जो इतना आत्मबल आपने मुझे दिया।
और इधर मोहिनी भी दिन पर दिन पूनम के चांद जैसी निखर रही है। और पढ़ाई में भी अव्वल दर्जे की कामयाबी हासिल करने में सक्षम है।
वह भी गायनेकोलॉजिस्ट डाक्टर बन गयी है।
दोनों अपनी अपनी जिंदगी में सफल हो गए।
दोनों साथ साथ अपनी बातें शेयर करते हैं।
मोहन बहुत मर्यादित आचरण मोहिनी के साथ करता है।
मोहन के मुखमंडल पर बहुत तेज है और बहुत सरल स्वभाव का है। उसकी आंखों में सबके लिए परवाह है।वह मोहिनी से एक अच्छे दोस्त की तरह व्यवहार करता है।
लेकिन मोहिनी के दिलो-दिमाग में हमेशा मोहन का चेहरा और स्वभाव बसा रहता। उसकी हर बात मोहिनी को अन्तर्मन तक विशीभूत कर जाती है।
वह हमेशा उसके ख्यालों में खोई रहती है।
समय के साथ साथ कृष्णा भी घनश्याम जी का बाया हाथ बन गया है घनश्याम जी उसके बगैर कहीं नहीं जाते हैं।
एक सुबह दरबान ने आपको कृष्णा को बताया ।कि कोई उनसे मिलने आया है।
कृष्णा चौका!
कौन है?
कहते हैं आपके गांव से आए हैं ।
अच्छा-- अंदर बुला लाओ।
कृष्णा जैसे ही उन लोगों को देखा उसने अपना मुंह फेर लिया।
भाई साहब हमें माफ कर दो।
इतने सालों बाद मेरी याद तुम्हें आई।और मेरा पता तुम्हें किसने दिया?
वो भाई साहब आपको अपने घनश्याम साहब के साथ कितनी बार टी वी पर देखा है।
ओहो !घनश्याम जी साहब के साथ।
घनश्याम जी इतने आदर्श और कर्तव्य निष्ठ है सब उनसे प्रभावित होकर उनका सम्मान करते हैं।
और पिता जी कैसे हैं?
पिताजी कुछ बरसों पहले हमें छोड़कर हमेशा के लिए चले गए। आपको बहुत ढूंढा लेकिन आप नहीं मिले।
यह तो बहुत दुख की बात है। मैंने भी उन्हें कोई खास खुशी नहीं दी।
कृष्णा को बहुत अफसोस हुआ।
कृष्णा ने कहा। और कहो कैसे आना हुआ।
बस कुछ नहीं भाईसाहब जी। हमने आप पर गलत
इल्जाम लगाया था।बस हमें माफ कर दो।
और एक छोटी सी सिफारिश अपने साहब से मेरे लिए करवा दो तो मेरा प्रमोशन हो जाएगा।
अब समझा तुम्हें मेरे साथ की नहीं।मुझे से जुड़े उस शख्सियत की पहूंच की जरूरत है।
चलो इस बहाने मेरे सिर से बोझ हल्का हुआ।
जो बिना गलती के मैं सह रहा था।
लेकिन मैं तुम्हारी कोई मदद नहीं कर सकता हूं।
मैं तो उनका एहसानमंद छोटा-सा मुलाजिम हूं।
मैं तो खुद उनके हाथों के नीचे कार्य करता हूं।
कृष्णा का भाई और उसकी पत्नी अपना सा मुंह लेकर लौट गए।
कैसे कैसे लोग होते हैं अपने मतलब के लिए अपनापन दिखाते हैं।
कृष्णा को उनकी गलत नीयत पता थी ।इसलिए उसने उनकी मदद करने से मना कर दिया।
वह कोई भी दबाव घनश्याम जी पर बनाना नहीं चाहता था ।।
नीलम गुप्ता (नजरिया)

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