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लगाती रही तू मरहम, सब के जख्मों पर उम्र भर!
कभी अपने दिल के टुकड़ों को भी सी लिया करो!!

क्यों इस तरह घुट घुट कर काट रही हो जिंदगी !
कभी अपने हिस्से की जिंदगी जी लिया करो !!

दिन-रात रखती हो ख्याल पूरे घर का तुम !
कभी अपने साथ ही एक कप चाय पी लिया करो!!

बन जाओ न फिर से नटखट नन्हीं सी गुड़िया !
कभी बच्चों संग उनके जैसी हरकतें भी किया करो !!

लगाती रही तू मरहम सबके  जख्मों पर उम्र भर !
कभी अपने दिल के टुकड़ों को भी सी लिया करो!!
..........✍️ पिंकी मिश्रा