बाघ संरक्षण
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बाघ को आरम्भ से ही अन्य जानवरों की तुलना में अपने राजसी ठाठ -बाट, प्रेरक व निडर स्वभाव के कारण एक विशिष्ट सामाजिक स्थिति प्राप्त है विशेषकर उसकी लावण्यता, ताकत, फुर्तीलापन और अपार शक्ति होने के कारण ही बाघ को राष्ट्रीय पशु के रूप में गौरंवित किया गया हैं व इसे शीर्ष वनचरों में गिना जाता हैं lइसकी मोटी पिली लोमचर्म का कोर्ट होता हैं जिसपर गहरी धारीदार पट्टीयां होता हैं, जो उसके सुंदरता में चार चाँद लगा देता हैं l जहाँ बाघ में वीरता और देवत्व के भाव होते हैं वहीं बाघों ने भी मनुष्य को सदैव अपनी प्राकृतिक भोजन श्रृंखला से परे एक जीव के तौर पर स्नेह बरसाया हैं lभारत में बाघों की घटती जनसंख्या की जाँच के लिए अप्रेल 1963 में ही बाघ परियोजना शुरू की गई व बाघ संरक्षण के उपाय भी किये गए,सफल भी रहा और अभी भी कार्यरत हैं l हमें देश में बाघों के विलुप्त होने से बचाने के लिए भारत सरकार व पर्यावरण मंत्रालय का पुरजोर सहयोग करना होगा चूँकि यह हमारा प्रथम कर्तव्य हैं, बाघ को एक बड़ा खतरा उसके शरीर के अंगों की मांग है, जिससे बचाना होगा, शिकार करने से रोकना होगा वन और इसके वन्य जीव क्षेत्र एक मुक्त खजाना हैं, इसलिए हमें उसका ऋणी होना चाहिए क्योंकि वन्य जीव हमें अनेक प्रकार से लाभान्वित करते हैं, हमें पशु संरक्षण क्षेत्र को प्राकृतिक पूँजी मानकर बाघ को संरक्षण प्रदान करना चाहिए इसके तीन प्रकार के उपाय से बाघ को संरक्षित किया जा सकता हैं :---------
1.वन्यजीव अभयारण्य
2. जैव मंडल
3. राष्ट्रीय उद्यान
बाघों के संरक्षण के बारे में हमें छोटे गाँव से महानगरों तक जागरूकता अभियान या अन्य माध्यमो के द्वारा जागरूक करना होगा, पशु भक्षण बंद करना होगा, पशु तस्करी बंद करना होगा इसके अलावे सबसे पहले वन्यजीव अभ्यारण्य बनाकर वन्यचरों को उन्मुक्त व स्वच्छन्द विचरण करने देना होगा उसे स्वतंत्र छोड़ना होगा और यह कारगर भी सिद्ध होगा उसके बाद अवश्यकता पड़ने पर ही उद्यान आदि में सुरक्षित संरक्षित किया जाय, संरक्षण की दिशा में प्रयासों का विस्तार करने की बहुत अवश्यकता हैं और इसकी गति बढ़ाने की अवश्यकता हैं और पर्यावरण संरक्षण की भी अतिअवश्यकता हैं ll
बाघों की मुख्यतः आठ प्रजातियाँ हैं, जिसमें बंगाल, साइबेरियन, साऊथ -चाइना, इंडो -चायनीज और सुमात्रा प्रजाति के बाघ अभी शेष हैं, जबकि बाली, जावा एवं अन्य प्रजाति के बाघ विलुप्त हैं l इस प्रकार ज्ञात आठ प्रजातियों में से रॉयल बंगाल टाइगर उत्तर पूर्वी क्षेत्रों को छोड़कर देश भर में पाया जाता हैं और परोसी देश नेपाल, भूटान और बांग्लादेश में भी पाया जाता हैं, आपको पता होगा कि नागपुर को भारत की टाइगर कैपिटल भी कहा जाता हैं क्योकि यह भारत में कई टाइगर रिजर्व को विश्व से जोड़ता हैं l
इस प्रकार हम अपने शब्दों में कहना चाहते हैं कि बाघ विशाल ऊर्जा का प्रतीक हैं, आत्मरक्षा की शक्ति हैं, बाघ राष्ट्रीय पशु के साथ -साथ भारतीय संस्कृति में भी महत्वपूर्ण स्थान रखता हैं इसलिए यह हमारा दायित्व हैं कि हम पर्यावरण संरक्षण करते हुए बाघ का संरक्षण करें जन -जन तक जागरूकता फैलाए क्योकि विश्व वन्यजीव कोष के अनुसार वर्तमान में केवल 3,900बाघ हैं, यदि हम बाघ संरक्षण करें तो हम बहुत ही लाभान्वित होंगे बाघ को संरक्षण करने के अतिरिक्त संरक्षित क्षेत्र में अनेक आर्थिक, सामाजिक, संस्कृतिक, आध्यात्मिक लाभ प्रदान होंगे इसके लिए विकास और वृद्धि के आर्थिक गणित के तहत पर्यावरण प्रणाली के मूल्य ध्यान में रखना होगा l
डॉ. ज्योति सिंह वेदी "येशु "
आदर्श नगर, मधेपुरा, विहार
स्वरचित एवं मौलिक रचना

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