दीपदंड रहे अखंड, प्रज्वलित सदा अग्नि रहे...!
कर्मशील रहे मनुज, धवलित सदा मति रहे...!
बढ़ते रहे निज ध्येय पथ, मुखरित सदा दृष्टि रहे...!
चढ़ते रहे लक्ष्यित शिखर पर, अचंभित सदा सृष्टि रहे...!

रंजना सोनी
चूरू, राजस्थान
स्वरचित एवं मौलिक