अपनों की दुआएं कहीं दूर भी हो।
तो भी आशीष बन लग जाती है।
निराश चहेरे पर आस की
उम्मीद आ जाती हैं।

हवाओं के संग संदेश पहुंच जाते है।
मन से निकल अच्छे या बुरे विचार ।
किसी का दिल दूर से भी न दुखाना।
ये नकारात्मकता दर्द बन उभर जाती हैं।

यहाँ रहो या दूर किसी दुनिया में।
अपनों की यादें हमेशा सताती है।
पास रहने से कुछ नहीं होता।
यद्यपि परवाह तुम्हारी बातें नहीं जताती हैं।

हमेशा सकरात्मक सोचो।
जो होना है अच्छे के लिए होना है।
फिर ना उलझे कोई उलझन।
ये ऊर्जा सब बात का हल होती हैं।

यथार्थ जीवन का मर्म पाया जिसने।
विकास गति से उसका होता हैं।
सत्य असत्य की पहचान से।
जद्दोजहद उस के जीवन से दूर होती हैं।

नीलम गुप्ता🌹🌹( नजरिया)🌹🌹
        दिल्ली