दुआ में उठा है हर हाथ
सुन लो अब हे आदिनाथ
कैसे तुम्हें मनाऊँ प्रभु
आ जाओ हे जगन्नाथ
कयामत का दिन है आया
अश्रु बहा रही है अँखिया
दुआ में झुका हर इंसान है
अब तो दिखाओ उजियारा
ना हो किसी से शिकवा शिकायत
रखें सबसे ही हम अपनायत
दिल में दुआ हो सबके लिए
होगी तभी खुदा की इनायत
दुआ में होता है असर बहुत
हमेशा होता है ये अच्युत
सलामत रहे ये दुनिया सारी
जग बचाओ हे पवन सुत
आरती झा(स्वरचित व मौलिक)
दिल्ली
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