तस्वीर आंखों में फिर से एक सजाई जाए,
फिर कोने मे दिल के इक जगह बनाई जाए
यादों के पन्नों से कुछ लम्हे चुराकर कर ,
चलो अहसासों की इक माला बनाई जाए ।
कुछ ख्वाब फिर देखें खुली आखों से
कुछ दिल्लगी हो जाए फिर अरमानों से
कि आगोश में चाँद हो और इक तन्हाई
इक शाम तो फिर से सुहानी बनाई जाए।
फिर देखो एक आहट पर मचलने लगे है,
गिरते गिरते देखो जरा संभलने लगे हैं।
दबी हुई जो इक अरसे राख के ढेर तले,
हवा देकर वो चिंगारी, फिर जलाई जाए ।
🙏रंजन लाल 🙏
इंदौर

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