जहां देखूं मै नजर आए बस तू ही तू,
तू ही है मां मेरे जीने की आरजू!
सबकुछ छोड़कर आई,मइया तेरे पास,
क्योंकि तुझपर ही है मेरी आस्था और विश्वास!
मेरी झोली से बढ़कर दिया हरदम मुझे,
अपने दर पर बुलाने के काबिल समझा मुझे!
मै हूं भिखारी तू मेरी मां,मुरादे पूरी करने वाली,
सच्ची आस्था और विश्वास जो लेकर जाए तेरे दर पर,
आए ना वापस खाली!
देगी हरदम मुझको सहारा,होगा जब भी घोर अंधेरा!
पकड लेगी हाथ मां मेरा,पक्का है विश्वास ये मेरा!
आस्था और विश्वास की जोत मन मे जलाकर,हरपल तुझको सिमरू,
क्योकि तू ही है मेरे जीने की आरजू!
श्वेता अरोडा

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