आज सुजाता के सामने वो सब कुछ है जिसकी उसने अपने आने वाले जीवन में कल्पना की थी। लेकिन इन सब चीजों से कहीं ज्यादा जरूरी है उसका पति जिसके कारण वो इस घर में आई जब वो ही उसके साथ कदम मिलाकर खड़ा नहीं हो सकता तो इस पैसे का क्या वजूद। सुजाता के भविष्य के वो सुनहरे सपने जिनकी उसने मनीष के साथ पूरे होने की कल्पना की थी आज उसके सामने टूटकर बिखर गए हैं। माना कि पैसा जरूरी है इंसान की जरूरतों को पूरा करने के लिए मगर इतना भी नहीं कि रिश्तों की जगह ले सके। सुजाता मन ही मन सोच रही थी की ,
" क्या उसके ससुराल वालों को वाकई रिश्तों की कद्र है? अगर होती तो एक लड़की की जिंदगी को क्या वो पैसों के तराजू में तोलते। लेकिन मैं कर भी क्या सकती हूं ?मैं तो इतनी बेबस हूं कि अपने मायके में भी कुछ नहीं बता सकती। क्या बोलूंगी अपने पिता को कि आपका दामाद एक सामान्य इंसान नहीं है ? वो जिस सीधेपन को उसका स्वभाव समझ रहे हैं वो उसकी कमजोरी है न कि उसका स्वभाव और जब कोई गलती से भी उसकी कमजोरी पर प्रहार कर दे तो वो अपना आपा ही खो बैठता है। वो सिर्फ तब तक ठीक है जब तक उसकी हां में हां मिलाते रहे नहीं तो उसके सर पर खून सवार हो जाता है।
लेकिन इन सब बातों को बताकर हो भी क्या सकता है।जो होना था वो तो हो गया । अब इन बातों को बताकर वो अपने माता पिता को दुखी क्यों करे ? उन्होंने तो अपनी जिम्मेदारी पूरी कर दी । मुझे जो कुछ भी मिला है वो तो मेरा भाग्य ही है। एक अकेली मैं ही थोड़े ही हूं, अभी तो दो बेटियां और भी हैं उनकी मैं उन सबकी राह का रोड़ा क्यों बनू ? वैसे भी भाग्य से ज्यादा और समय से पहले कभी किसी को नहीं मिलता । शायद मेरे भाग्य में यही था।
उसके सामने मनीष की असलियत आने से उसके सास ससुर को थोड़ी चिंता तो हुई लेकिन सुजाता के कुछ भी आपत्ति न करने पर वो खुश भी थे। कुछ दिन में सुजाता को मायके भी जाना है ये सोचकर उन्होंने सुजाता को अच्छे से समझा दिया कि वो किसी भी बात की चिंता न करे हम हमेशा तुम्हारे साथ हैं। और अपने घर पर ये सारी बातें बताकर उन सभी को भी क्यों परेशान करना। सुजाता की सास ने उसे बताया की मनीष की तबियत पहले से काफी ठीक है । डॉक्टर ने कहा भी है कि अगर उसके साथ प्यार से पेश आया जाए और उसकी दवाइयों का ध्यान रखा जाए तो कुछ समय के बाद वो ठीक भी हो सकता है। इसीलिए तो हमने मनीष की शादी के बारे में सोचा था । और तुम जैसी अच्छी, समझदार लड़की को चुना था । क्यों कि हमें पूरा भरोसा था कि तुम मनीष को बहत खुश रखोगी और एक दिन वो बिलकुल ठीक हो जायेगा। और वैसे भी वो कोई बचपन से थोड़े ही ऐसा है।जो ठीक नहीं हो पाएगा । सुजाता को अपनी सास की बातें सुनकर एक उम्मीद की किरण दिखाई दी कि उसका पति ठीक हो सकता है। वो खुद उसका ध्यान रखेगी और उसकी हर जरूरत का भी । उसको शिकायत का कोई मौका नहीं देगी। सुजाता को ये विश्वाश हो गया कि उसके ससुराल वाले उसे बहुत चाहते हैं।
अभी तक सुजाता ने अपने मायके में किसी को भी इस बारे में नहीं बताया था। अपने मायके गए हुए उसे बहुत समय हो गया है । उसकी मां ने कई बार उसे बुलाया भी लेकिन वो हर बार टाल देती । क्यों कि वो मनीष को छोड़ के जाना ही नहीं चाहती । उसने कुछ दिनों में ये महसूस भी किया कि मनीष उसके साथ बहुत खुश रहता है। एक बार सुजाता ने मनीष को अपने मायके जाने के बारे में बताया तो उसने भी साथ चलने की जिद की। इसलिए सुजाता ने अपने जाने का प्लान भी कैंसिल कर दिया । क्यों कि वो नहीं चाहती थी की मनीष के बारे में उसके मायके में किसी को कुछ भी पता चले। लेकिन उसके माता पिता सोचने लगे कि शायद हमारी बेटी को ससुराल में इतना प्यार मिल रहा है कि उसे हमारी याद ही नहीं आ रही । और उन्हें ऐसा लगता भी क्यों नहीं सुजाता अपने ससुराल के सभी लोगों की बहुत तारीफ जो करती थी अपने घर वालों से। और वैसे भी माता पित तो यही चाहते हैं कि उनकी बेटी अपने ससुराल में हमेशा खुश रहे। उन्हें तो इस बात की भनक भी नहीं थी की उनकी बेटी उनसे कुछ छुपा भी रही है।
एक दिन सुजाता को पता चला कि उसकी छोटी बहन उससे मिलने उसके घर आना चाहती है। सुजाता को समझ ही नहीं आ रहा कि वो क्या करे बहन से यहां आने की मना भी नहीं कर सकती और बुला भी नहीं सकती। वो सोचने लगी, ऐसे कब तक वो किसी को आने से रोक पाएगी ? और कब तक खुद भी मायके नहीं जाएगी ? आखिर में उसने सोचा कि एक दो दिन की ही तो बात है वो संभाल लेगी। अगले ही दिन सुजाता की बहन प्रिया भाई के साथ उसके घर आ गई। सुजाता अपने भाई बहन को देख कर बहुत खुश हुई। सुजाता के भाई राहुल ने उसे बताया कि उसे कुछ काम है इसलिए आज शाम को ही चला जायेगा। लेकिन प्रिया को लेने वो तीन चार दिन के बाद आएगा। वो क्या कहती उसने अपने भाई की हां में हां मिलादी।
अगले दिन सुजाता की सास और ससुर जी कही बाहर गए हुए थे। सुजाता उनके कपड़े रखने उनके कमरे में गई तो उसने मेज पर एक फाइल रखी देखी। उसने फाइल को अलमारी में रखने के लिया उठाया तो देखा कि उस पर मनीष का नाम लिखा है। उसे समझते देर नहीं लगी कि ये मनीष की बीमारी से संबंधित फाइल है। उसने फाइल को खोल के देखा तो उसमे मनीष के अब तक के सारे चेकअप की रिपोर्ट और दवाइयों के पर्चे थे। फाइल को देख कर वो उसे अलमारी में रखने लगी तो उसे कुछ याद आया उसने दोबारा से फाइल को देखा। पहले उसने फाइल के सिर्फ आगे के पेपर ही देखे थे। जब उसने सबसे आखिरी के पेपर देखे तो उसके होश ही उड़ गए।
क्रमश: अगले भाग में....✍️

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