पड़ा परिवार से पाला जिम्मेदारी बढ़ी इश्क का दामन छूट गया।
जीवन में बढ़ा काम का बोझ भागदौड़ मची रोज-रोज इश्क का दामन छूट गया।।
मां की आंखों में खुशी देखने की चाहत जब जागी इश्क का दामन छूट गया।
भाई बहन की प्रेम में पड़ कर जब जीने की चाह जगी इश्क का दामन छूट गया।।
सतगुरु की वाणी को सुनकर मोह भागा जब जीवन से इश्क का दामन छूट गया।
राम प्रेम में रंग गया जीवन स्वास स्वास जब राम जपे इश्क का दामन छूट गया।।
स्वरचित मौलिक अप्रकाशित सर्वाधिकार सुरक्षित डॉ आशा श्रीवास्तव जबलपुर

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