काश मिल जाये पँख मुझे भी
नील गगन की सैर कर आऊँ
अपने जीवन के पलों को
स्वच्छन्दता से मैं जी जाऊँ
नहीं चाहिए कुरीतियों के बन्धन
बस मुझपर एक उपकार करो
सबकी इच्छा का भी मान रख सकूँ
ऐसा ही मुझमें संस्कार भरो
भूखे भेड़ियों के हाथ न आऊँ
स्वतंत्र हो प्रगति पथ चल पाऊँ
अपनी कुल की मर्यादा की मान
बढ़ाकर जग में उच्च ख्याति पाऊँ .....
नेहा शर्मा

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