गोरी हौले हौले चल नाजुक है तेरा पाँव 
छाले न पड़ जाएं अब दूर नहीं है गांव 
चल सुस्ता ले थोड़ा उस पीपल के छाँव 
गोरी हौले हौले चल नाजुक है तेरा पाँव 

मैं जानो हूँ तेरे हिय की बात 
तू सोच रही कहीं बीत न जाए रात 
वहाँ बच्चे है हमारे जिनसे बहुत है लगाव 
गोरी हौले हौले चल नाजुक है तेरा पाँव

क्यूँ हो तुम घबराती जब मैं साथ हूँ तेरे 
संग संग चलेंगे हम जब लिए हैं सात फेरे 
मुझको सब सच बता दे छुपा न कोई घाव 
गोरी धीरे धीरे चल नाजुक है तेरा पाँव

पैदल चल रही हो ये बात मैंने है माना 
मैं भी चल लूं साथ इसलिए तेरे संग जाना 
संग संग साथ रहने सी बढ़ेगा प्रेम प्रभाव 
गोरी धीरे धीरे चल नाजुक है तेरा पाँव

मैं श्याम तू गोरी 
मैं चंदा तू चकोरी 
चल आ जाए उधर जहाँ नदी किनारे नांव 
गोरी धीरे धीरे चल नाजुक है तेरा पाँव

मुकेश लखनवी