ये राखी के धागो के,अनमोल रिश्ते "
ये सदियों से, हम सबके दिल में है, बसते! 
है जनमों का बंधन ,ये भाई बहन का, 
कभी भी न विछुडें, ये दिल में है रहते!! 

वो बचपन में, बहन के शिकायत भरे पल, 
बडी बहन के संग, बिताया हुआ कल! 
वो छोटी सी बहेना की, दादी सी बातें.
वही सारे पल, पलकों में बसते!! 

वो भाई का दिनभर, सताना झगडना, 
गले से लगाकर, फिर माफ करना! 
रूलाती है, यादें, वो बचपन की बातें, 
वही सारे रिश्ते, जो दिल है बसते!! 

मुकम्मल जहाँ है, हमारी खुशी का"
न छूटे कभी, साथ भाई बहन का! 
रुठे मनाये, रहे साथ में वो!, 
ये राखी के धागे, यही चाह रखते!! 

बढे मान सम्मान, भाई का मेरे, 
दुआओं में बहेना के भाई है बसते! 
न पलकों से आंसू, आये बहनों के, 
हर पल दुआ ये विधाता से करते!! 

श्रीमती रीमा महेंद्र ठाकुर " लेखिका "
रानापुर झाबुआ मध्यप्रदेश भारत