"इश्क कब हो जाता है पता ही नहीं चलता।आज मयंक को न देख कर उसकी कमी खल रही है।कुछ अच्छा नहीं लग रहा क्या यही इश्क है।"
संजना बैठी सोच रही थी।शाम का धुंधलका फैलता जा रहा था।उसे चाय की तलब हुई तो जा कर एक कप चाय बना लाई और पीते पीते मयंक के बारे में सोचने लगी।
मयंक आत्मविश्वास से भरपूर आकर्षक युवक था। आफिस में काम के सिलसिले में बातचीत करते और रोज मिलते रहने से वह कब उसकी ओर आकर्षित हो गई जान ही नहीं पाई।
तीन दिन से मयंक आफिस नहीं आ रहा था।उसको न देखने पर संजना को कुछ अधूरापन लगने लगा ,तभी उसे समझ आया कि यह आकर्षण क्या है।
संजना सहज ही इस बात को स्वीकार करने से कतरा रही थी। वह अपने अतीत में पहुंच गई जब उसके साथ पढ़ने वाले विशाल से वह प्यार करने लगी थी। विशाल भी संजना को पसंद करता था।
उसने संजना को बता दिया था कि वह अपना भविष्य सुनिश्चित करने के बाद ही उसके परिवार वालों से उसका हाथ मांग लेगा।संजना ने उसका सहयोग देने का वादा किया और अपनी पढ़ाई जारी रखी। दोनो मिलते रहे और अपने वादों पर अटल रहे।
विशाल सम्पन्न परिवार का आकर्षक लड़का था।पढ़ने में तेज और अपने भविष्य के प्रति जागरूक था।उसका लक्ष्य IPS बनना था।
BA के बाद विशाल प्रतियोगी परीक्षाओं में बैठा और सेलेक्ट ही गया। अधिकारी बनने की सबसे पहली सूचना उसने संजना को दी।
अब सही अवसर देख विशाल के माता पिता उसके विवाह की बात करने लगे। विशाल ने उन्हें संजना के बारे में बताया तो उन्होंने अपनी सहमति दे दी।
दोनों परिवारों ने मिल कर बच्चों की खुशी के लिए इस रिश्ते को स्वीकार कर लिया।उचित मुहूर्त देख दोनो का विवाह कर दिया गया।
विशाल और संजना ने हंसी खुशी अपनी नई जिंदगी शुरू की।लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।ड्यूटी पर जाते हुए विशाल को कुछ आतंकवादियों ने घेर लिया।उनका मुकाबला करते हुए वह लहूलुहान हो गया पर अंतिम सांस तक लड़ते हुए उसने दो आतंकवादियों को ढेर कर दिया।
संजना की तो दुनिया ही लूट गई। छह महीने ही हुए थे शादी के,सब सपने चकनाचूर हो गए।
विशाल के माता पिता ने समझदारी से काम लिया।संजना को सहारा देकर उसके अंदर आत्मविश्वास और परिस्थितियों का सामना करने की हिम्मत जगाई।
उन्होंने संजना को प्रतियोगी परीक्षाओं में बैठने के लिये प्रोत्साहित किया।आखिर उसका चयन भी एक अच्छी कम्पनी में हो गया।यहाँ उसकी मुलाकात मयंक से हुई।
संजना के धीर गम्भीर व्यक्तित्व ने मयंक को भी आकर्षित किया।उसे ऐसी ही लड़की अपनी जीवन संगनी के रूप में चाहिए थी।
एक दिन अवसर देख कर मयंक ने उससे कहा,
"संजना मैं आप से कुछ कहना चाहता हूँ,अगर आप बुरा न माने।"
संजना बोली कहिये ।
"क्या तुम मेरे हाथ में जीवन भर के लिये अपना हाथ दे सकती हो?"
इतना सुनना था कि संजना की आंखों से आंसू बहने लगे।
मयंक ने घबरा कर पूछा, "क्या मैंने कुछ अनुचित कह दिया?"
संजना बोली ,""आप मेरे बारे में कुछ नहीं जानते।मेरी सच्चाई सुनने के बाद शायद आप को अपने प्रस्ताव पर पश्चाताप होने लगे।""
"आप बतायें तो क्या बात है।"
संजना ने कहा, " मैं विधवा हूँ।"
"तो इसमें आपका क्या दोष।मैं इसपर भी आपको स्वीकार करूं तो आपको कोई आपत्ति तो नहीं होगी।"
"इसके लिए आपको मेरे सास ससुर से बात करनी होगी।वह मुझे अपनी बेटी मानते हैं।मैं उनकी आज्ञा के बिना कुछ नहीं करूंगी।"
मयंक ने उसकी बात का सम्मान रखा।वह कुछ दिन बाद अपने माता पिता के साथ संजना के घर गया।उसके सास ससुर के सामने संजना के साथ विवाह का प्रस्ताव रखा।
सबने हंसी खुशी इस रिश्ते को स्वीकार किया।उन लोगों ने संजना को अपनी बेटी की तरह ही मयंक के साथ विदा किया।और सदा सौभाग्यवती रहने का आशीर्वाद दिया।
संजना को भी अपना दूसरा प्यार मिल गया।
रेनु सिंह

2 टिप्पणियाँ