तुम खुश रहो भैया दूर रहकर भी आप की सलामती चाहते हैं

धागे की प्रेम हमेशा बनी रहे
बरसों बीत गए  आपसे मिले हुए

बचपन की यादों में मैं जब खो जाती हूं तेरी याद बहुत आती है
अब तो वो गुजरा जमाना बचपन का
शहर की जिंदगी में भूल गए होंगे
अपने बच्चों के रक्षाबंधन का उत्साह देखकर तेरी याद बहुत आती है
समय के साथ हर  रिश्ते  धूमिल हो जाते हैं, पर तेरी याद बहुत आती है

भाई बहनों का प्रेम भाभियों को रास नहीं आती है उन्हें तो बस ननद ही नजर आती है।

अब तो वक्त के साथ  रिश्ते भी बदल गए स्नेह प्रेम सब कुछ पैसा और  मंहगे गिफ्ट पर आकर टिक ग‌ए

शहरों की चकाचौंध और भागदौड़ वाली जिंदगी गांव की जिंदगी रास नहीं आएगी अब......


अब तो बरसो आंखें तरस गए
अगले राखी पर मिलने आओगे कब
ऑनलाइन राखी भेजने में आनंद नहीं आता जो  माथे पर तिलक
हाथों की कलाई पर रेशम की डोरी बांधने मे आती है

जो राखी बांधने में आनंद था
आज वह रिश्ता महंगे मिठाई और
भाभियों के ताने मे रह गए
प्रेम का वह अटूट बंधन शायद
बिखरता चला  गया है
ना मेरा दोष ना तेरा दोष
समय और जिम्मेदारियों का
 फिक सब रिश्तो को दूर कर रहा है
  
तेरी पसंद की मिठाई राखी पर नोंक-झोंक की याद बहुत सताती  है

काश लौट जाते  दुबारा बचपन मे
अब तो बस रिश्ते का प्रेम गिफ्ट और
मंहगे महंगे चीजों तक सिमट ग‌ए
नहीं चाहिए संपति मे बराबर का हिस्सा मुझे तो बस प्यार और स्नेह चाहिए.....


मायका मेरा हमेशा खुशहाल रहे 
धन और संपत्ति का  भंडार रहे
भ‌ईया मेरा हमेशा खुशहाल और आबाद रहे... ‌‌

भाई बहनों का प्रेम हमेशा बना रहे 
रक्षाबंधन पर तेरी याद बहुत आती है
राखी पर फिर कब आओगे
तेरी याद बहुत सताती है


सपना कुमारी जहानाबाद बिहार