कितने अजीब से इस दुनिया के मेले है ।
हर तरफ है महफ़िल पर दिल अकेले है।।
जिधर देखती हु ,खुशी ही खुशी है।
पर बिन तुम्हारे हम कितने अकेले है।।
लगी रोनके है ,महोब्बत के मेले है ।
ना जाने किऊ तेरे बिन हम अकेले है।।
कही खाब है कही तन्हाई ओ के रेले है।
ना जाने किऊ तेरे बिन हम अकेले है।।
ना बिछडने के गम ओर ना मिलने के झमेले है।
ना जाने किऊ तेरे बिन हम अकेले है। ।
जे भी खुब है तेरी आदत छोड़ने की।
तेरे साथ तन्हा , तेरे बिन भी अकेले है ।।
कितने अजीब से************।

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