"प्रेम तब तक एक शब्द भर है
जब तक आप इसका अहसास नहीं कर लेते।"
कहानी है एक चरवाहे और अंग्रेज अफसर की बेटी की अधूरी प्रेम कहानी की,जो आज अमर हो गई।हर कोई उन्हें याद करता ,उनका नाम लेता ।
"इतिहास के पन्ने में यूं ही नहीं छपते किस्से
कितनो का रक्त बहा है उसमे दर्ज होने को।"
छोटा नागपुर वनों जलप्रपातों , छोटी छोटी नदियों , वन्य जीवों और खनिजों के लिए प्रसिद्ध है।यहां कुदरत ने अपनी खूबसूरती जम कर लुटाई है।
सूर्योदय सूर्यास्त देखना हो तो छोटानागपुर की रानी कहे जाने वाले नेतरहाट में आपका स्वागत है।यहां ऊंची ऊंची चोटियां व खाइयों का विहंगम दृश्य देखकर वहीं बस जाने को मन करने लगता है ।
ऐसा ही कुछ हुआ था ,एक अंग्रेज अफसर के साथ।
आजादी के पहले की बात है,तब झारखंड की अनछुई नैसर्गिक खूबसूरती स्वर्ग के समान थी।वो अंग्रेज आया तो था घूमने पर हो गया यहीं का।उसने नेतरहाट में रुकने का फैसला कर लिया।
मैग्नोलिया उसकी प्यारी बेटी ,जिससे वो दोनो अंग्रेज दंपत्ति बहुत प्यार करते थे।
मैग्नोलिया दीवानी थी एक चरवाहे की बांसुरी की।
चरवाहा अपनी भेड़ ,बकरियां लेकर सनसेट प्वाइंट के एक चट्टान पर जा बैठता तो पूरी तल्लीनता से बांसुरी बजाने लगता।
उसकी बांसुरी की मधुर धुन सुन मैग्नोलिया भागी चली आती ,और उसकी बांसुरी की धुन में खो जाती ।
इसी क्रम में दोनों को एक दूसरे से प्यार हो गया।वो घंटों उसके साथ समय बिताती ,उसका सानिध्य चरवाहे को भी असीम सुख देता।
लेकिन कहते हैं ना इश्क और मुश्क छिपाए न छिपते। उन वादियों में उनके प्यार की खुशबू बिखर रही थी।
खबर मैग्नोलिया के पिता को लगी ,उन्होंने चरवाहे को बहुत समझाया ,प्रलोभन दिया ,लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। अंत में प्यार के उस परिंदे को एक अंग्रेज अफसर की बेटी से प्यार करने की सजा भुगतनी पड़ी ,उसकी हत्या करा दी गई।
उसकी हत्या से मैग्नोलिया बहुत दुखी थी,वो बार बार उस चट्टान के पास जाती ,उसे लगता नीचे खाई से उसे उसका चरवाहा पुकार रहा है। अंत में अपने प्रेम का विछोह न सह पाई और एक दिन घोड़े सहित पहाड़ से कूद गई।
उनकी ये अधूरी प्रेम कहानी आज भी वहां के
जर्रे जर्रे में बसती है।लोग उस जगह पर जरूर जाते हैं जहां चरवाहा बैठ कर अपनी बांसुरी बजाता था।

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