आज...आज़मा कर देख लो,
मेरे प्यार की कशिश...
ना मिलेंगे ख़ामियां तुम्हें,
बातें घुमाकर देख लो...
रुह बनी है...तेरे यादों की,
हवाओं से पूछ लो...
करूँगा तुम्हें...हद से ज्यादा मोहोब्बत,
हाथों की लकीरों से पूछ लो...
बेदर्द जमाने की ओझल से,
खुद को निकाल करके देख लो...
कभी मेरे दिल की गहराइयों में
जड़ा झाँख करके देख लो...
मैं बना हूँ...तूम्हारा,
खुद पर यकीं...करके देख लो...
चाहत भी है तुम्हारी,
कभी...पास आकर देख लो...
✍️ विकास कुमार लाभ
मधुबनी(बिहार)

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