आप क्या चाहती है , कि स्वाति मुझे मजबूरी में अपनाये ! नहीं ना ! मां आप मुझ पर भरोसा रखो मैं सब ठीक कर दूंगा । अच्छा अब आप सो जाओ । बहुत रात हो गई है । मैं शिवू को ले जाता हूं । सरला जी के गले लगते हुए रविश कहते हैं । रविश , शिवांश को उठाकर अपने साथ अपने कमरें में ले आते हैं । सरला जी , रविश को जाते देखकर मन में - हे भगवान , ये तू कैसी परिक्षा ले रहा है । अगर रविश को पता चल गया कि साक्षी वापस आ चुकी है , तो .... नहीं - नहीं हे भगवान इस साक्षी नाम की मुसीबत से मेरे बेटे को दूर रखना । सरला जी हाथ जोड़ते हुए कहती हैं । उधर रविश शिवांश को बैड पर सुलाकर , अपने लिए एक तकिया और ब्लैंकेट लेकर कमरें में बने सोफे पर सोने जा रहे होते हैं कि .... स्वाति उन्हें मना कर देती है । स्वाति - आप ये क्या कर रहे हैं । रविश चौंकते हुए स्वाति की तरफ देखते हैं । स्वाति धीरे से - मुझे ये बिल्कुल अच्छा नहीं लगेगा कि आप मेरी वजह से सोफे पर सोये और ये बैड इतना बड़ा है कि हम तीनों इस पर आराम से सो जायेंगे । रविश - स्वाति , मैं यहां ठीक हूं । तुम और शिवू आराम से बैड पर सो जाओ , ठीक है गुड नाईट स्वाति । स्वाति मन में बैड की तरफ देखते हुए - अब इन्हें मैं कैसे बताऊं कि कभी - कभी सोते हुए मैं बैड पर से गिर जाती हूं । ये तो मेरे लिए बहुत शर्मिंदगी वाली बात हो जायेगी । क्या करुं ! कैसे इन्हें बैड पर सोने के लिए कहूं । स्वाति परेशान हो जाती है । दरअसल हुआ यह था कि , बैड को ऐसी जगह रखा गया है कि बैड का एक सिरा दीवार की तरफ है । और दूसरा दीवार से थोड़ी दूर पर है । रविश ने शिवांश को बैड के बीच में सुला दिया था । जहां से वो खिसकते हुए दूसरे छोर पर चला गया । अगर वो थोड़ा और खिसका तो पलंग से नीचे गिर सकता था । स्वाति वही खड़े - खड़े कभी शिवांश को देखती तो कभी सोफे पर सो रहे रविश की तरफ देखती । आखिर कब तक ऐसे ही खड़े रहती । कुछ समय बाद स्वाति , शिवांश को धीरे से ऊठा कर दीवार की तरफ सुला कर खुद दूसरी तरफ हो गई । पलंग पर लेटते ही स्वाति को नींद आ गई । कुछ समय बाद ही स्वाति और शिवांश एक गार्डन में थे । शिवांश , स्वाति को परेशान करने के लिए इधर से उधर दौड़ रहा है और स्वाति , शिवांश को पकड़ने के लिए उसके पीछे-पीछे दौड़ रही है कि अचानक स्वाति का पैर फिसला और वो गुलाटी खाते हुए गार्डन से गिरने लगी । धड़ाम ....आह मां । स्वाति सपना देखते हुए पलंग से नीचे गिर पड़ी थी ।
क्रमशः
रचनाकार - श्वेता सोनी

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