नारी को वस्तु ना समझो तुम
वह अनलसुधा चिंगारी है
है अगर प्रेम की देवी तो
प्रतिशोध की तीव्र कटारी है
मत व्यर्थ कोई प्रलाप करो
अनुचित न कोई संवाद करो
मत सीमा लांघो तुम अपनी
मत उसका तुम व्यापार करो
उसके आंसू यदि गरल बने
यह विश्व भस्म हो जाएगा
यदि चीख उठी वो पीड़ा से
 तब हाहाकार मच जाएगा
केवल सोलह श्रृंगार नहीं
तलवार की क्षमता है उसमें
दुर्गा का रूप उसी में है
और मां की ममता भी उसमें
हे मानव सोच समझ ले तू
है  स्त्री अब कमजोर नहीं
जिस क्षेत्र में जाते हो तुम सब
वो क्षेत्र अब उससे दूर नहीं

संगीता शर्मा" (सहायक अध्यापक)
प्राथमिक विद्यालय