.गउरा चली चल दिहली नइहरवा,बरीजे बर बउरहवा ना ...
के हमरे अब भागिया पिसीहन के जेवना बनाइ ना ...
रिमझिम बरसे लगल फूहारवा बरीजे बर बउरहवा ना ..
सखिया संग इठलाती गउरा शिव को लुभाती ना ..
सावन में भावे नइहरवा कइसे हम रूक जाई ना ...
गउरा चल दिहली ...
सखियन संग गउरा झूला झूले, मन अगरइली ना ...
भोले बाबा कइली ना दूसर विवाहवा हमसे भांग पिसावे ना ...
रूनुक -झूनुक शिव डमरू बजावे,धुइयां रमावे ना ...
नंदी भंगिया पीस लियावे शिव के भोग लगावे ना ...
गउरी चल दिहली नइहरवा शिव जी डमरू बजावे ना !!

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