देश भक्ति काव्य 
     
यह बुंदेलखंड की धरती हो गए बड़े बड़े सरदार
आल्हा ऊदल रहे महोबा मनिया देव कीरत सागर ताल
आल्हा ऊदल बड़े लड़इया जिनके हाथ रही तलवार
 छत्रसाल पन्ना के राजा गुरु प्राणनाथ उनके साथ गुरु कृपा से हीरा पाए मुगल ना उनसे पाए पार
जैतपुर के राजा पारीछत बेलाताल है सागर ताल राजा ने गोरों को डट के धूल चटाई बारंबार
झांसी की रानी लक्ष्मीबाई बुंदेलों की आन और शान आज खड़ा है किला झांसी गाता उनकी कीर्ति अपार
जबलपुर की रानी दुर्गावती अकबर ने भी मानी हार है बुंदेलखंड यह देखो देखो इसकी बहती धार


 कण-कण में बिखरी है वीरता बच्चा बच्चा वीर जवान इतना मान भरा जीवन में सब कुछ कर देते बलिदान
 स्वरचित मौलिक अप्रकाशित सर्वाधिकार युक्त 
डॉ आशा श्रीवास्तव जबलपुर